March 6, 2026

महत्पूर्ण किताब: कुछ कवि कुछ किताबें

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नरेश चंद्रकर

अपने समय के कवियों से जीवंत संवाद :कुछ कवि कुछ किताबें
— विजय सिंह
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हिंदी कविता में कवि नरेश चंद्रकर ने एक मुक्कमल ज़गह हासिल की है जहाँ उनकी कविताएँ हैं और कविताओं की तरह सहज – सरल उनका जीवन . नरेश चंद्रकर सिर्फ एक अच्छे कवि नहीं हैं बल्कि कवि के साथ एक अच्छे मनुष्य भी हैं. जबकि बहुतेरे कवियों को अपनी कविता से बाहर आते हुए मैंने नहीं देखा है ,एेसे कवियों से बात करते हुए डर लगता है जबकि कवि नरेश चंद्रकर से बात करते हुए आप डरते नहीं हैं , एक जीवन उत्साह के साथ आप उठ खड़े होते हैं. नरेश चंद्रकर से मेरी एक दो मुलाकातें हैं लेकिन फोन और चिट्ठियों में हम खूब बात करते हैं. वे जितने अच्छे कवि हैं उतने अच्छे पाठक , उतने अधिक पढ़ाकू कवि हैं. वे वरिष्ठ कवियों से लेकर नवोदित -लेखकों – कवियों को खूब पढ़ते हैं ,उनके साथ जीवंत संवाद भी करते हैं. इस बात का प्रमाण है अभी हाल में छपी उनकी महत्वपूर्ण कृति ” कुछ कवि कुछ किताबें” 298 पृष्ठों की मोटी सी यह किताब जिसे लोकमित्र ने बहुत सुंदर ढंग से छापा है. यह कृति अपने समय के कवियों के रचना संसार, दृष्टि, विचार और उनकी काव्य मिट्टी से परिचित कराता है. कविता को लेकर इस समय की उल्लेखनीय जीवंत किताब है”कुछ कवि कुछ किताबें “इस किताब में अधिकांश वह सारे कवि शामिल हैं जिनसे हिन्दी कविता की मिट्टी उर्वर हुई है. तो वहीं कुछ नये – संभावनाशील कवि कवयित्रियाँ भी शामिल हैं जिनसे हिंदी कविता को और आगे जाना है. नरेश चंद्रकर ने एक बार बात करते हुए मुझसे कहा था कि ” मैं आलोचक नहीं हूँ बल्कि साहित्य – कविता का एक अदना सा पाठक हूँ, मुझे पढ़ना अच्छा लगता है खासकर अपने अपने समय में लिख रहे कवियों को पढ़कर अपने समय से जुड़ना मुझे समृध्द करता है. नरेश चंद्रकर की लगातार पढ़ते रहने की उपलब्धि है यह अनूठी कृति ” कुछ कवि कुछ किताबें ” . नरेश चंद्रकर की यह कृति आलोचना की भावभूमि से, हटकर इसमें शामिल कवियों की कविताओं को सहजता से रेखांकित करते हुए, उनके समग्र रचना के संसार को पकड़ने की जीवंत कोशिश है यह किताब. मैंने पहले लिखा है इस किताब में अधिकांश वे कवि शामिल हैं जिनसे हिंदी कविता समृध्द हुई है. एेसे महत्वपूर्ण कवियों पर लिखना वह भी उनकी कविता की प्रकृति, संरचना के साथ उनकी कविता दृष्टि – विचार और प्रभाव को जीवन के साथ छूना कितना चुनौतिपूर्ण है ? कवि नरेश चंद्रकर इसमें मुझे सफल दिखते हैं. क्योंकि इस किताब में शामिल सभी कवि अपनी काव्य प्रतिबध्दता के साथ एक अलग – जीवन ताप के साथ आगे आते हैं. इस किताब में लगभग बत्तीस कवि शामिल हैं. इस किताब के पहले कवि “कबीर ” हैं नरेश चंद्रकर ने ‘ कबीर केवल कवि ‘ लिखकर हमारी कविता के प्रभाव को सामने रखा है यदि सचमुच आप कवि हैं तो आपकी कविता जनमानस में होगी .कवि कर्म उतना सहज नहीं है जितना कि आज बना दिया गया है काल से होड़ लेने वाली बात है, और इस बात को नरेश ने सिध्द भी किया है. कबीर पर लिखते हुए नरेश चंद्रकर लिखते हैं ” उनकी कविता में कई एेसे कोने हैं, जहाँ किसी उदात्त पुरूष से हमारी मुलाकात होती है जिसके पास जीवन के पके अनुभव हैं , आगे नरेश लिखते हैं कबीर की कविताएँ दिल बहलाने की चीज नहीं है, हाँ दिल हिलाने वाली चीजें बहुत हैं –

जिन आपको जोया नहीं, मन मैल को धोया नहीं/ दिल दाग को खोया नहीं, अँगुल किया तो क्या हुवा!! (कबीर)
इस किताब में शामिल कवियों की कविता पर चर्चा करते जो शीर्षक नरेश चंद्रकर ने दिये हैं वह उस के कवि के कविता संसार से पाठक को सहजता से जोड़ता है. इस गद्य कृति में शामिल कवि हैं – सुमित्रानंदन पंत – कविता और बूढ़ा चाँद, नागार्जुन – हमारे समय का सबसे विश्वसनीय मुखपत्र रचती कविताएँ, शमशेर – लौट आ, ओ फूल की पंखुड़ी, त्रिलोचन – हम जीवन की हरी डाल पर झूल रहे हैं, केदारनाथ अग्रवाल – केन के जल से बना कवि, मलय- काल क्यों घूरता है कवि मलय को, विजेन्द्र – कविता पढ़ते पृथ्वी साथ घूमती रही, भगवत रावत – मैं दुनिया के बहुत जरूरी कामों से निकला हूँ,नरेश सक्सेना- चाँद फास्फोरस की तरह दमकता है आवारा पानियों में, राजेश जोशी – राजेश जोशी की कविताएँ बौध्दिक मर्म पर खरौंच पैदा करती है, अरूण कमल – मैं वो हूँ जिसकी गिनती होने से रह गई, लीलाधर मंडलोई – एक कुबड़े यर्थाथ को कंधा देता कवि लीलाधर मंडलोई . जैसे काव्य पंक्तियों के शीर्षकों से नरेश चंद्रकर ने इस किताब को और पठनीय बनाया है. इस किताब में शामिल अन्य कवि गण हैं – उदय प्रकाश, सुधीर सक्सेना, ओम भारती, विजय कुमार ,देवी प्रसाद मिश्र, शैलेन्द्र चौहान, विमल कुमार, अनिल गंगल, कात्यायनी, बोधिसत्व, प्रताप राव कदम, विजय सिंह, मनोज शर्मा, आरती, केशव तिवारी ,मोहन सगोरिया और सुजाता जैसी कवयित्रियों के कविता जीवन पर वृहद प्रकाश डाला है. अपनी कविता, अपने कविता समय को देखने – समझने के लिए यह कृति बहुत महत्वपूर्ण है. कवि नरेश चंद्रकर के सहज कृति का स्वागत किया जाना चाहिए और इस किताब को पढ़ते हुए अपने कविता समय, परंपरा से जुड़कर अपने आप को
समृध्द करना है एेसा मानना है .मेरा निवेदन है इस महत्वपूर्ण कृति को आप भी पढ़ें महत्वपूर्ण किताब के लिए नरेश भाई खूब बधाई. ☘️🌿🌹🌷
विजय सिंह
बंद टाकीज़ के सामने, जगदलपुर, बस्तर

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