हम आजाद हैं
अपनी आजादी को हम हरगिज लुटा सकते नहीं।* गाते हुए वे झूम रहे थे। सीना तानकर फूल रहे थे। सिर के बाल उनके दिलीप कुमार की तरह लहलहा रहे थे।
मैंने कहा कि ये तो बहुत अच्छी बात है कि आप अपनी आजादी लुटाने के लिए तैयार नहीं हैं.. लेकिन लोग आपकी आजादी लूटने के लिए तैयार बैठे हैं तब आप क्या करेंगे वे ट्रेजिडी किंग की तरह गमगीन हो गए। फिर फुसफुसाकर पूछे कि ‘ये लूटने वाले कहां से आ गए.’
‘लूटने वाले भी आपके आसपास हैं। आपके हुक्मरान हैं।‘ मैंने भी फुसफुसाते हुए कहा।
‘मेरा दिल कोई हिन्दुस्तान नहीं जिस पर हुकुमत की जावे।‘ उन्होंने युसुफ मियाँ की तरह धांसू डायलाग मारा। फिर थियेट्रिकल अन्दाज में वे लाउड हो गए ‘अरे आज गाने का दिन है तो कम से कम गा तो लेने दीजिये।‘ मैंने कहा ‘गाइये .. गाइये और अपनी आजादी के जश्न मनाइये।‘ मैं उन्हें गाता बजाता छोड़…