October 22, 2026
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देश की खातिर पढ़ना है
देश की खातिर बढ़ना है
देश की खातिर जीएंगे
देश की खातिर मरना है

देश हमारा न्यारा है
देश हमारा प्यारा है
सत्य, शिव और सुंदर का
स्वर्गिक देश हमारा है

देश माता है, पिता है
संस्कृतियों का सविता है सविता ( सूर्य )
बाइबिल है, गुरुग्रंथ भी है
जहां कुरान है, गीता है

देश आन है, देश है मान
देश तान है, देश है शान
जीवन के इस पुण्य सफर में
देश हृदय है, देश है प्राण

देश पे वारें तन, मन, धन
देश का कण-कण है चंदन
नमन देश की माटी को
देश का वंदन, अभिनंदन

हम देश के सच्चे सिपाही
कर्तव्य पथों के दृढ़ राही
कैसी भी हो घड़ी कठिन
बिदकेंगे हर्गिज नाही

हम जहां-जहां भी जाएंगे
अपना ध्वज फहराएंगे
और शांति, सद्भावों से
धरा को स्वर्ग बनाएंगे

कमलेश चंद्राकर
( सर्वाधिकार सुरक्षित )
चित्रांकन – डाॅ. सुनीता वर्मा।

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