बेटी दिवस पर दो कविताएं
बेटी
छोटी- बिटिया
सम्भालती है
घर को
माँ की तरह.
छोटे भाई की
पोंछती है नाक
झाडू-बुहारू
चौका- चूल्हा
आए- गए में
हाथ बटाती है
माँ का.
छुटकू को
सिखाती है
ऊंगली पकड़
चिन्हाती है
A B C D
अ आ इ ई
वन टू
एकदम
मैडम की तरह.
पिता की
छोटी- छोटी
जरूरतों के प्रति
सजग है
दादी की तरह.
बिटिया में
अंखुआ रही है
एक छोटी माँ
बिल्कुल वैसी ही
ठीक
मेरी मां की तरह।
लड़कियाँ
लड़कियाँ
सुन्दर होती हैं|
सुन्दर लड़कियाँ
बात नहीं करतीं
अजनबियों से|
अजनबी
होते हैं पेड़ और
बह जाती हैं लड़कियाँ
नदी की तरह|
तट के पेड़
सूखने नहीं देते
नदी को
और नदी
दुलारती रहती है
जड़ों के
रेशे- रेशे|
सुप्रभात
डॉ प्रेमकुमार पाण्डेय
केन्द्रीय विद्यालय सरायपाली
9826561819