March 6, 2026
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जिसके नूर से रोशन सारा आलम है
उसकी खोज में डूबा हुआ हर आदम है।

उसकी रहमत रोशन करती दुनिया को
उसके करम से ही ये दुनिया क़ायम है

उसको क़ैद न रक्खो मंदिर मस्जिद में
उसका ही तो बेशक सारा आलम है

हर इक सांस में जिसकी यादें शामिल हैं
मेरी ज़ीस्त का अब तो वो ही आज़म है

जिसकी रहमत से रौनक है दुनिया में
उसके बिना तो हर लम्हे में मातम है

सख़्त सज़ाएं कैसे देगा बच्चों को,
रब का मन तो, कोमल और मुलायम है।
अल्पना सुहासिनी

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