राम की बहुरिया बीमार है अवध में
हिन्दी नवगीत के प्रखर रचनाकार भाई भारतेन्दु मिश्र ने भी अपने लिए ज़िन्दगी का नेपथ्य चुन लिया। उन्हीं के एक शानदार गीत से उन्हें याद कर रहा हूँ, प्रणाम कर रहा हूँ। अब कौन लिखेगा ऐसे सहज गीत, जिसमें हमारा समय ही बोलता हो। वो कहते थे लय मनुष्य होने की पहली शर्त है और नवगीत नित नवीन लयानुसंधान है।वो समाज के कैंसर की शल्य क्रिया कर रहे थे पर अपनी देह के कैंसर से हार गए। मन का विज्ञान लिखते थे, आज उनके सारे गीत उदास हैं ।अवध की सोंधी मिट्टी उनकी बोली बानी में सुवास देती थी। अवधी की सिद्धि के भी वो अप्रतिम अनुगायक थे। प्रस्तुत गीत उनके स्वर में सुनना अत्यंत रोमांचकारी होता था।ये गीत आज दिशाओं में गूंज सा रहा है। आप भी जुड़ें इस गीत की मार्मिकता से, वो कहते भी थे, हम न होंगे, गीत होंगे/
राम की बहुरिया बीमार है अवध में
राम की बहुरिया बीमार है अवध में
रामराज वाली सरकार है अवध में
कर्फ्यू है, दंगे हैं
हर तरफ़ तनाव है
सरयू भी ठिठक रही
थमा जल प्रवाह है
शांति का कपोत ख़बरदार है अवध में
अधनंगे सम्प्रदाय
आधा सच कह रहे
भोली गौरैयों के
स्वर्ण पंख ढह रहे
बाजों का होता त्यौहार है अवध में
अधिग्रहीत सुविधा पर
काग की नज़र है
नीलकंठ विष पीने को
फिर आतुर है
बंधा आज कांटों का तार है अवध में
तीर हो रहे पैने
सरयू के घाट पर
प्रश्न चिन्ह अंकित हैं
देश के ललाट पर
घर घर में मिलता हथियार है अवध में।
/ यश मालवीय