सुनो ज़माना ख़राब है…
सुनो
ज़माना ख़राब है
चाहत है मेरी
रख मैं आऊँ
दो जलते दिए
चौखट पर तेरी
जिसके भीतर
न जाने की
मजबूरी है मेरी
मगर पूरी कैसे हो
ये मासूम सी चाहत
ज़माना ख़राब है,,,,
सुनो
चलो दीप बन जल लें हम
मैं इधर
तुम उधर
और माँग लें दुआएँ
कि
ये प्रेम दीप
सदा रहें प्रज्वलित
दोनों ही तरफ
चुपचाप
कि
ज़माना ख़राब है,,,,
शुभ दीपावली
🪔🪔🪔🪔🪔
शुचि ‘भवि’
भिलाई, छत्तीसगढ़