लक्ष्मीनामस्तोत्रम
[ हेमंत देवलेकर की पठनीय कविता ]
जेब में फूटी न हो तो— कौड़ी
चमड़ी जाने पर जो न जाए वो— दमड़ी
गड़ा मिल जाए तो—धन
तहख़ाने में दबा मिले तो— ख़ज़ाना
अपार हो तो— संपत्ति
बेहिसाब हो तो—दौलत
ब्लैक हो तो—मनी
बैंक में हो तो— रक़म
महीने भर बाद मिले तो— पगार
रोज़ मिले तो—दाड़की
हाड़ तुड़ाकर मिली तो—मजूरी
भाग्य से मिले तो— लॉटरी
कृपा से हो हासिल तो— ऋण
माथे जो चढ़ जाए तो— क़र्ज़
लिखी जाए तो— वसीयत
हाथ लग जाए तो— माल
छापा पड़ने पर मिले तो— नक़दी
लूटी गई जो, वो— तिजोरी
रखी गई वो— रेहन
पूजी जाए तो— लक्ष्मी
सज़ा की तरह भुगतें तो— जुर्माना
सम्मान सहित मिले तो— मानदेय
ज़ब्त हो जाए तो— ज़मानत
सौंपी अगर जाए तो— अमानत
रिहाई के बदले माँगो तो— फ़िरौती
विदाई के बदले माँगो तो— दहेज
जिसे देना न टाला जाए वो— कर
ऐसी माँ लछमी के नाम हैं सहस्तर…