मिट्टी में…
इक दिन हम सब लोग मिलेंगे मिट्टी में ।
लेकिन मिलकर हमीं खिलेंगे मिट्टी में ।।
मिट्टी है अनमोल,इसे उर्वर रखना है ।
इसकी छाती पर गऊ का- गोबर रखना है ।
हरे-भरे तब खेत हँसेंगे मिट्टी में ।।
मिट्टी यानी माँ यह प्यारी,बंद करें शोषण।
मृदा शुद्ध संरक्षित हो तो,सुंदर हो जीवन।
अगर न देंगे ध्यान धसेंगे मिट्टी में ।।
मनुज नहीं हर जीव-जंतु को,
यह अनुपम उपहार।
लेकिन माता झेल रही है,
नित्य प्रदूषण-मार ।
सुधरें वरना लोग गलेंगे मिट्टी में ।
@ गिरीश पंकज