March 6, 2026

एक पुरानी मेरी अपनी सबसे पसंदीदा ग़ज़ल

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जज़्बात ग़ज़ल संग्रह से

कौन है जो बुरा नहीं होता,
शख़्स कोई ख़ुदा नहीं होता।

बात कुछ तो ज़रूर होगी ही,
कोई ऐसे ख़फ़ा नहीं होता।

जिंदगी बस ये सोचते गुज़री,
काश ये, वो हुआ नहीं होता ।

अबके दिल तोड़ना सलीके से,
ये रफ़ू हर दफ़ा नहीं होता।

मुख़्तसर ज़िंदगी में जीने का,
तयशुदा फ़लसफ़ा नहीं होता।

दिल्लगी दिल लगी न बन जाये,
इश्क़ में कुछ पता नहीं होता।

शायरी कौन मेरी है जिसमें,
आपका तज़किरा नहीं होता।

दिल का सौदा बड़ा ख़सारे का,
यार इसमें नफ़ा नहीं होता।

बात करता जो पारसाई की,
वो नयन पारसा नहीं होता

सीमा ‘नयन’

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