July 23, 2026
डॉ लालित्य ललित

लालित्य ललित

उसका रास्ता मत रोको
उसे छन कर आने दो
खिड़की-किवाड़ों को खोल दो
उसे आने दो
मन भी स्वच्छ होगा और तन भी
एक बार मुस्कराने दो
भैया जी
धूप को आने दो

एक बार देखो
दुबारा देखो और तिबारा
अब उससे इश्क कर लो
वह आपकी हो जाएगी और आप उसके
एक बार हो जाने दें
इश्क की वर्षा
मोहब्बत की वर्षा
ये खुशबू है प्यार की
दुलार की
एक बार जो होना है हो जाने दो
भैया जी
धूप को आने दो
आप का विकास होगा और छू मंतर से भीतर से
सर्दी नामक शब्द का निकास होगा
भैया जी
धूप को आने दो
इश्क हो जाने दो
प्यार हो जाने दो
हो जाने दो
इश्क
प्यार
मोहब्ब्त और सोहबत
हो जाने दो
भैया जी धूप को आने दो।
मन से
तन से और भीतर से उसका स्वागत करें।

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