(यह कविता उन सभी लोगों को समर्पित है जो अपने प्रिय से दूर आखरी साँसें गिन रहे हैं और अपने प्रिय की एक झलक पाना चाहते हैं)
आख़िरी गीत --------------------- आख़िरी गीत.. मुहब्बत का.. गुनगुना तो चलूँ। अंधेरा छा रहा है.. दीया लड़खड़ा रहा है.. झलक मिल...
आख़िरी गीत --------------------- आख़िरी गीत.. मुहब्बत का.. गुनगुना तो चलूँ। अंधेरा छा रहा है.. दीया लड़खड़ा रहा है.. झलक मिल...
कच्ची मिट्टी की छितराई हुई दिवार जहाँ एक दीमक लगी खिड़की भी थी...... वहीं कहीं आस पास एक शाम ढली!!!!!...
रुपरेखा : प्रस्तावना -विश्व पत्रकारिता दिवस २०२१ - विश्व पत्रकारिता समिति - विश्व पत्रकारिता दिवस का इतिहास - विश्व पत्रकारिता...
विजयदत्त श्रीधर, भोपाल Sudhir Sharma: भारतीय पत्रकारिता की अपनी अलग पहचान Sudhir Sharma: हैं। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के ओज...
मुद्दे श्मशान की धूंधूं के बीच अखबार पटे रहे बलात्कार हत्या और गुरबत की ताजा- तरीन खबरों से राजा और...
आज का चिंतन धर्म और राजनीति धर्म का अर्थ होता है 'धारण करने योग्य".. धर्म मानव जीवन को जीने के...
कलचुरियों की रायपुर शाखा कुछ समय के लिए खल्लवाटिका(खल्लारी) में शासन कर रही थी। यहां से 1402 ई. एवं 1415...
बहन! क्या होती है बहन इक भाई के सिर का ताज होती है या शीतल मन में बहती प्रेममय रसधार...
हाँ मैं सच में भूल जाती हूँ ==================== वे अक्सर बात-बात पर खफा हो जाते हैं मुझसे कहते हैं... भूल...
नई सुबह, नया प्रभात, 🙏🍀🍀 * वक्त का समय * अभी वक्त ने समय मांगा है , थोड़ा ठहरो फिर...