March 6, 2026

रजपुरा के पुरावशेष : भोरमदेव क्षेत्र

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भोरमदेव के फणि नागवंशियों के अवशेष आस-पास के क्षेत्रों में बिखरे पड़े हैं। कई गांव में आज भी वृक्षों के नीचे अथवा आधुनिक मंदिरों में तत्कालीन समय की मूर्ति अथवा प्रस्तर खंड मिल जाते हैं।

ग्राम ‘रजपुरा’ भोरमदेव के पास ही दक्षिण में लगभग चार-पांच किलोमीटर की दूरी पर है। नाम से ही पता चल रहा है कि ‘राजापुर’ का बिगड़ा रूप हो सकता है। संयोग से इस गांव के बारे ऐतिहासिक साक्ष्य भी उपलब्ध है। फणि नागवंशी राजा रामचन्द्र राय/देव के मड़वा महल अभिलेख संवत 1406(1349 ई.) जिसमे फणि नागवंशी शासकों की वंशावली दी गई है, से ज्ञात होता है कि “राजपुरा गांव देवता के भोगराग के लिए प्रदान किया गया था”। इससे गांव के प्राचीनता का पता चलता है।

वर्तमान में रजपुरा में गांव के उत्तर में लगभग आधा कि. मी. की दूरी पर पहाड़ी के तलछटी में एक स्थल है जिसे स्थानीय लोग ‘किनरिया पाट’ कहते हैं। यह स्थल छोटा सा पुरातात्विक टीला सा है जिसके चारों ओर खेत हैं। स्थल निरीक्षण से अनुमान होता है कि पहले यह ‘टीला’ अपेक्षाकृत बड़ा रहा होगा।पहाड़ी से सटे होने के कारण सम्भव है पहले खेत भी न रहे हों। बाद में खेत बने होंगे और धीरे-धीरे उसे खेत के क्षेत्र को बढ़ाते जाने से टीला सिकुड़ता गया होगा। वर्तमान में वह तीन-चार सौ वर्गफीट से अधिक नहीं जान पड़ता।

इस टीले में वर्तमान में दो सती स्तम्भ हैं और एक उपासक स्त्री की खंडित मूर्ति है। आस-पास फणिवंश कालीन ईंटों के टुकड़े बिखरे और मिट्टी में धसे हैं। टीले में बड़े-बड़े वृक्ष और झाड़ी उग आये हैं। इन सती स्तम्भों को ग्रामवासी पूजते हैं।

यह ‘टीला’ मंदिर का अवशेष नहीं जान पड़ता क्योंकि प्रस्तरखण्डों के अवशेष नहीं दिखाई पड़तें। ऐसा प्रतीत होता है कि यह ‘सती चौरा’ जैसा स्थल रहा होगा। सम्भव है किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति/राजपुरुष की पत्नी यहां सती हुई रही हो। स्थल की खुदाई से और पुरावशेष प्राप्त होने की संभावना है।

गांव में एक वृक्ष के नीचे खंडित देवी मूर्ति है जो चामुंडा/काली की जान पड़ती है।

गांव के बाहर पहाड़ी की तलछटी में एक प्राकृतिक पत्थर है जिसे गांववासी ‘जलहरी’कहते हैं और पूजते है।

पास ही तालाब के पार में सात-आठ इमली वृक्षों के बीच ‘बावा देवता’ है, मगर वहां पुरावशेष नहीं है।
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*मड़वा महल अभिलेख के विषय वस्तु के लिए देखें ‘इंस्क्रिप्सन इन सीपी एंड बरार’- राय बहादुर हीरा लाल(1916)

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●अजय चन्द्रवंशी, कवर्धा(छत्तीसगढ़)
मो. 9893728320

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