विनम्र, सहज, सबको मान देने वाले पुनू राम साहू…
कुछ गांव और शहर अपने सपूतों को विशेष गुण अनुभव,ज्ञान और दिशा देते हैं तो कुछ सपूतों के कारण गांव,शहर क़स्बे भी साहित्य केन्द्र के रूप में चर्चित होते हैं। धमतरी जिले का क़स्बा मगरलोड़ ऐसा ही कस्बा है जहां संगम साहित्य एवं सांस्कृतिक समिति का गठन कर पुनूराम ने इतिहास रच दिया। मगरलोड ऐसा नामवर कस्बा है जिसे पूनूराम साहू राज ने अपने साहित्यिक साधक मित्रों के सहयोग से छत्तीसगढ़ का नामी साहित्य केन्द्र बना दिया।
पुनूराम साहू गरीब परिवार में पचास में जन्में मगर पिता की अनुपस्थिति में नानी ने स्कूल में ४८लिखा दिया जिसके कारण छत्तीसगढ़ कोआपरेटिव बैंक मगरलोड से ४१ वर्ष नौकरी कर भाई पुनू रिटायर हुए अन्यथा डेढ़ वर्ष और नौकरी करते।
उनके पिता बीड़ी मजदूर और मां भी मेहनतकश थी। ग़रीबी के कारण पुनू भाई मिडिल तक पढ़ पाए।
छुटपन से चित्रकारी , काव्य लेखन की रुचि थी।
वे मिडिल पास कर घर का काम करते थे।उनके पड़ोसी थे दक्षिण भारतीय हेड क्लर्क केरलियन चाको।पुनू राम कविता का एक छंद लिख पाए थे कि चाको अंकल ने कहा जा दूध ला दे।आज्ञाकारी पुनू दूध लाने चले गए।चाको ने उसके जाने पर कागज को पढ़ा ।नेहरु जी पर मार्मिक चार पंक्तियां श्रद्धांजलि की थी
नेहरु का प्यारा गुलाब मैं
फूलों में न्यारा गुलाब मैं
साथी मेरा छोड़ चला है
मुझसे नाता तोड़ चला है
किसके लिए अब मैं मुसकाऊं
खिलूं सदा और मुरझाऊं।
चाको यह पढ़कर चकित रह गए। दूसरे दिन चाको ने अपने प्रभाव सेबीडी ओ आर एन श्रीवास्तव से कहकर समिति सेवक बनवा दिया। कालांतर में छत्तीसगढ़ कोआपरेटिव बेंक बना तो रायपुर की एक शाखा मगरलोड़ में बनी।पुनू राम तब तक देश बंधु नवभारत में ग्रामीण रिपोर्टर का काम कर, रेडियो श्रोता संघ में सक्रिय रहकर कविता मंच पर काव्य पाठ कर चर्चित हो चुके थे। लेकिन मिडिल पास होने के कारण मगरलोड़ कोवापरेटिव बेंक में चतुर्थ वर्ग कर्मचारी बन सके।
४१वर्ष उसी रूप में अपने गांव की शाखा में काम कर सेवानिवृत्त हुए।एक ही जगह जहां से भर्ती हुए वहीं से रिटायर हुए यह अनोखा रिकार्ड है।इससे सिद्ध होता है कि पुनू राम लोगों के दिलों में सचमुच राज करते हैं।
एक बार जो पुनू राम के करीब आ जाता है वह छूट नहीं पाता। विनम्र,सहज ,सबको मान देने वाले पुनू राम लगातार लेखक के रूप में चर्चित हुए। मगरलोड के दशरथ लाल निषाद वीरेंद्र सरल सहित बहुत प्रतिभाशाली साथियों का सतत् सहयोग लेकर सांस्कृतिक भवन जो वहां बनाया गया वह बेमिशाल है।
लगातार वहां कार्यशाला,साहित्य समारोह होते हैं। समृद्ध वाचनालय वहां है।
पुनू राम का नाम लिखाते समय नानी ने जन्म वर्ष ४८ दिखाया पुनूराम साहू के पचहत्तरवें जन्म वर्ष पर जो अभिनंदन हुआ ग्रंथ में छपा कि उन्हें अब तक ४८ सम्मान विभिन्न संगठनों संस्थानों से मिला है।
दिव्य नानी जैसी आत्माएं क्या चमत्कार दिखाती हैं यह इस प्रसंग से हम समझ पाते हैं।उनकी माता सुहेला बाई साहूगाने के लिए विख्यात थी। इसीलिए पुनू राम लेखक,कवि, चित्रकार,समाजसेवी के रुप में ढलकर यश के मार्ग पर सतत् चलते चले आए।
अब भी भाई पुनू राम साहू उसी तरह सक्रिय हैं।
पिछ्ले दिनों जब अपने नाती नीतीश के जन्म दिवस पर उसे आशीष दिलाने हम मगरलोड गए तो अगास दिया की ओर से सम्मान कर मैंने भाई पुनू राम और साथियों के साथ मिल बैठ कर खुद को भी समृद्ध किया। बधाई।आभार।
डॉ परदेशी राम वर्मा