March 6, 2026

“अजीत जोगी: अनकही कहानी”

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“हाँ, मैं सपनों का सौदागर हूँ…” — जब सदन में यह स्वीकारोक्ति स्वयं कोई नेता करे, तो वह वाक्य व्यंग्य नहीं, बल्कि एक वैचारिक घोषणा बन जाता है।
अजीत जोगी को यदि केवल उनके पदों—आईपीएस, आईएएस, चार बार सांसद, और छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री—तक सीमित कर दिया जाए, तो उनकी कहानी अधूरी रह जाती है। वे सचमुच सपनों के सौदागर थे, पर वे सपने निजी नहीं, सार्वजनिक थे—राज्य की खुशहाली, किसानों की तरक्की, आदिवासियों के उत्थान, “जल-जंगल-जमीन” की रक्षा और छत्तीसगढ़ी अस्मिता के सम्मान के सपने।
सपनों का अर्थ क्या था?
जोगी जी के वाक्यों में सपना देखना केवल भाषण का हिस्सा नहीं था। नवगठित छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक संरचना खड़ी करना, नई नीतियों की रूपरेखा बनाना और राज्य की पहचान गढ़ना—ये सब उस “सपने” को जमीन देने के प्रयास थे। वे जानते थे कि बिना दृष्टि (vision) के कोई नया राज्य दिशा नहीं पा सकता।
राजनीति में आने के बाद भी उनका संवाद शैली ठेठ छत्तीसगढ़ी अंदाज में बनी रही—यही उनकी जनस्वीकार्यता का आधार भी था।
इस पुस्तक में यह स्पष्ट होता है कि सत्ता के शिखर पर पहुँचने वाला व्यक्ति भी संघर्ष, संवेदना और असुरक्षाओं से अछूता नहीं होता।
क्या वे वास्तव में “सौदागर” थे?
यदि “सौदागर” शब्द का अर्थ केवल वादों की बिक्री है, तो यह आरोप हो सकता है। पर यदि “सौदागर” का अर्थ है—आशा बाँटना, भविष्य की कल्पना करना और उस पर विश्वास जगाना—तो वे निस्संदेह सपनों के सौदागर थे। उनसे सारे मतभेदों के बीच भी आपको उनके इस पक्ष को स्वीकारना पड़ेगा।

उन्होंने स्वयं कहा था—
“अगर सपना देखना बुरा है, तो मैं देखूँगा… और सपना देखूँगा, तभी उसे पूरा कर पाऊँगा।” अंततः, किसी भी समाज, प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए यथार्थ से अधिक जरूरी है—एक स्पष्ट और साहसी सपना।अजीत जोगी का जीवन इसी सत्य की मिसाल है कि नेतृत्व केवल सत्ता का उपभोग नहीं, बल्कि दृष्टि, संघर्ष और अपने प्रदेश के प्रति प्रतिबद्धता का नाम है।

अजीत जोगी वास्तव में सपनों के सौदागर थे? वह इस बात से परहेज भी नहीं करते थे – खुलेआम विधानसभा के सदन में कहते थे, ” हां मैं सपनों का सौदागर हूं” मैं सपना देखता हूं छत्तीसगढ़ के विकास का मैं सपना देखता हूं छत्तीसगढ़ के खुशहाली का मैं सपना देखता हूं छत्तीसगढ़ के किसानों की तरक्की का , हां मैं सपना देखता हूं छत्तीसगढ़ के बेरोजगारों को रोजगार देने का , हा मैं सपना देखता हूं छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के उत्थान का , हा मैं सपना देखता हूं जंग जंगल और जमीन को बचाने का , हां मैं सपना देखता हूं छत्तीसगढ़ी भाषा के विकाश का और अगर यह सपना देखना बुरा है तो मैं देखूंगा और सपना सौ बार देखूंगा तभी तो इस सपने को पूरा कर पाऊंगा?

श्रीमती रेणु जोगी जी द्वारा लिखित व अभी हाल में विमोचित स्व श्री अजीत जोगी की एक अनकही कहानी पुस्तक को पढ़ने का अवसर मिला ,वास्तव में राजनीति के क्षेत्र के लोगों को अजित जोगी पर लिखी पुस्तक पढ़ना चाहिए ,क्योंकि मैने उन्हें करीब से देखा है,जाना है इसलिए मुझे यह पुस्तक पढ़ने की तृष्णा थी।

जब अजीत जोगी को केवल पदों और उपलब्धियों की सूची में बांधकर देखा जाता है, तब उनकी कहानी अधूरी रह जाती है। लेकिन जब उनकी जीवनसंगिनी रेणु जोगी द्वारा लिखित “अजीत जोगी: अनकही कहानी” पढ़ने का अवसर मिलता है, तब एक प्रशासक से आगे बढ़कर एक संवेदनशील इंसान का चेहरा सामने आता है । अजीत जोगी जी के अनेक प्रसंग अभी भी अनछुए है जो उनके अपनो के स्मरण में है ।

सख्त प्रशासक, सरल हृदय
अजीत जोगी की पहचान एक कठोर और अनुशासित प्रशासक के रूप में रही। प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्होंने निर्णय लेने की क्षमता और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया। लेकिन इसी कठोरता के भीतर एक सहृदय मन भी था—जो आम आदमी की पीड़ा को समझता था और उसके लिए संवेदनशील रहता था।

भोपाल से अभियांत्रिकी की पढ़ाई में गोल्ड मेडल हासिल करना उनके मेधावी व्यक्तित्व का प्रमाण था। इसके बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में अपनी योग्यता का लोहा मनवाया। यह यात्रा केवल पद प्राप्त करने की नहीं थी, बल्कि जिम्मेदारियों को निभाने की थी।

राजनीति में प्रवेश के बाद वे चार बार सांसद बने और जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ, तब वे उसके प्रथम मुख्यमंत्री बने। यह केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं थी, बल्कि नवगठित राज्य की दिशा और दशा तय करने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी भी थी। एक नए राज्य को प्रशासनिक ढांचे से लेकर विकास की दृष्टि तक मजबूत आधार देने का कार्य उन्होंने किया

अजीत जोगी की सबसे बड़ी ताकत थी—उनकी जनसंपर्क क्षमता। गांव-गांव जाकर सीधे लोगों से मिलना, उनकी भाषा में संवाद करना, ठेठ छत्तीसगढ़ी अंदाज में अपनी बात रखना—यही उन्हें आम लोगों का नेता बनाता था। वे मंच पर जितने प्रभावशाली वक्ता थे, उतने ही सहज व्यक्तिगत संवाद में भी थे।
भाषण कला और वैश्विक पहचान
उनकी भाषण शैली में तर्क, संवेदना और प्रभाव का अद्भुत समन्वय था। देश-विदेश में उनकी पहचान एक प्रभावी नेता के रूप में बनी। वे केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई।

पुस्तक में उनके जीवन के ऐसे प्रसंग सामने आते हैं, जो एक संवेदनशील पति, पिता और मित्र के रूप में उनकी छवि को उजागर करते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी उनका धैर्य और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण प्रेरणादायी रहा।

अजीत जोगी केवल छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री नहीं थे; वे एक विचार, एक संघर्ष और एक संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल थे। उनकी अनकही कहानी हमें यह समझाती है कि बड़े पदों के पीछे एक इंसान भी होता है—जो सपने देखता है, संघर्ष करता है और समाज के लिए कुछ स्थायी छोड़ जाना चाहता है।
उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि नेतृत्व केवल सत्ता नहीं, अपने जन्मभूमि के लिए कुछ करने, सेवा और संवेदना का नाम है।
( मनोज शुक्ला)
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