स्मृति शेष त्रिभुवन पाण्डेय
हिन्दी जगत के श्रेष्ठ व्यंग्यकार
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साहित्य की लगभग हर विधा में उन्होंने ख़ूब लिखा ,लेकिन हिन्दी जगत में उनकी पहचान मुख्य रूप से एक श्रेष्ठ व्यंग्यकार के रूप में बनी। कई दशकों से लगातार जारी उनकी साहित्य साधना अचानक थम गयी। छत्तीसगढ़ के जिला मुख्यालय धमतरी के पास अपने गृह ग्राम सोरिद में 5 मार्च 2021 की रात उनका निधन हो गया। ‘भगवान विष्णु की भारत यात्रा ‘ जैसे कालजयी व्यंग्य उपन्यास के रचनाकार त्रिभुवन पाण्डेय अपनी जीवन यात्रा को चिर विश्राम देकर हमें अलविदा कह गए।
वह छत्तीसगढ़ के उन गिने -चुने वरिष्ठ कवियों और लेखकों में से थे ,जिन्होंने अपनी रचनाओं से राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की और अपने प्रदेश का गौरव बढ़ाया। उनकी प्रमुख कृतियों में व्यंग्य संग्रह ‘पम्पापुर की कथा’ और ‘ब्यूटी पार्लर में भालू ‘ हास्य -व्यंग्य एकांकी संग्रह ‘पंछी मत हँसो ‘, गीत संग्रह – ‘सुनो सूत्रधार’, ‘कागज की नाव ‘, ‘गाओ वन पाँखी’ भी उल्लेखनीय हैं ।
इन कृतियों के अलावा उन्होंने कई नाटक भी लिखे। वह एक गंभीर साहित्य समीक्षक भी थे।उनका जन्म 21 नवम्बर 1938 को धमतरी में हुआ था। वह धमतरी से लगे हुए ग्राम सोरिद के निवासी थे। वर्षों तक उन्होंने धमतरी के शासकीय महाविद्यालय में अध्यापन कार्य भी किया। वह साहित्य ,कला और संस्कृति के धीर -गंभीर अध्येता और समीक्षक थे। ख़ूब पढ़ते थे ।
उनके निधन के लगभग सवा साल पहले एक साहित्यिक आयोजन में उनसे मेरी मुलाकात हुई थी और लगभग दो महीने पहले फोन पर भी बात हुई थी। कौन जानता था कि अब कभी उनसे न तो बात हो पाएगी और न ही मुलाकात । विनम्र श्रद्धांजलि ।
स्वराज करुण