April 23, 2026

रात हुई तो इन आँखों में…

0
2

रात हुई तो इन आँखों में, जगमग – जगमग तारे आए।
दिन में जिनको भूल चुका था! याद मुझे वो सारे आए।

चिड़िया जैसी वो इक लड़की
बंदर जैसे दोस्त पुराने
माँझे जैसी उलझी शामें
सिगड़ी पर मक्के के दाने

डुबकी मार के उन यादों में, आँसू खारे – खारे आए।
रात हुई तो इन आँखों में, जगमग – जगमग तारे आए।

माँ के आँचल के बादल में
रोटी सब्जी दूध पराठे
छुप छुप के बदमाशी करना
और बदले में खाना चाँटे

पेट जिन्हें परदेस ले आया, उनको याद नज़ारे आए!
रात हुई तो इन आँखों में, जगमग – जगमग तारे आए।

सीमा पर जो दोस्त मरा था
इक वो जिस को जेल हुई थी
इक लड़की उड़ती फिरती थी
खेत में जिसके गहरी कुई थी

मोक्ष अभी तक नहीं मिला है, कहने को बेचारे आए!
रात हुई तो इन आँखों में जगमग – जगमग तारे आए।

दाँत कुचरणी वाले दादा
मेहंदी की शौक़ीन वो ताई
कितने अपने फिसल गए हैं
जीने पर मरने की काई

ईश्वर! उमर बढ़ा दे सबकी, विनती लेकर द्वारे आए।
रात हुई तो इन आँखों में जगमग – जगमग तारे आए।

________
Manmeet Soni Writes

गीत : “रात हुई तो इन आँखों में”

#मनमीत_के_कुछ_नए_गीत_एक_नई_सीरीज़ 12

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *