October 22, 2026

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लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की कविताएँ

मृत्यु जब मेरे सिरहाने खड़ी होगी... जब किसी दिन मृत्यु मेरे सिरहाने खड़ी होगी मुझे वास्तव में डरा रही होगी...

राजकुमार पार्श्वनाथ और तीर्थंकर पार्श्वनाथ

-डॉ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’, इन्दौर जैन धर्म की मुख्य दो धाराएँ हैं- एक दिगम्बर जैन और दूसरे श्वेताम्बर जैन। दिगम्बर,...

कोरोना रूपी ये अंधियारा शीघ्र भाग ही जायेगा

चारों ओर सन्नाटा पसरा और अंधियारी छाई है, क्रूर कोरोना ने मेरे भैया अपनी धूम मचाई है । और उग्र...

रमण की आंखों से झलकती है कविता -प्रो वाजपेयी

टैगोर और नवीन के परंपरा के कवि हैं किरण-तिवारी कबूतरी बहुत सुंदर थी की समीक्षा गोष्ठी का आयोजन बिलासपुर। छत्तीसगढ़...

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