October 22, 2026

Chhattisgarh Mitra

बीच बहस में: विनोद कुमार शुक्ल की उपन्यास- दृष्टि

वीरेंद्र यादव हिंदी उपन्यास में दो दृष्टियों का टकराव आमने-सामने रहा है एक दृष्टि भारतीय समाज के संश्लिष्ट यथार्थ से...

नदी का पानी आदिवासी लड़की की हैँसी जैसा था

( आदिवासी : गीत और स्वप्न पर कुछ कविताएँ) (एक) पहाड़ की गोद में एक बहुत पुराना टूटा ढोलक पड़ा...

मातृभाषा में लौटने का उजाला

आज के दिन को मैंने कई बार अपने भीतर दोहराया। साहित्य अकादमी और बिहार सरकार के संयुक्त आयोजन 'उन्मेष 2025'...

व्यंग्य के तीर चलाने में सुदक्ष और कुशल : व्यंग्यरत्न हँसमुख वीरेन्द्र सरल

कृष्ण कुमार अजनबी 14 जून 1971 को तत्कालीन मध्यप्रदेश और वर्तमान में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के अंतर्गत बोडरा ग्राम...

युद्ध सिर्फ़ सरहदों पर नहीं होते

ज़मीन को चाहे किसी भी पैमाने से माप लो उसका बँटवारा कभी नहीं होता सम-तुल्य। कहीं मौसम रंग बदल लेंगे,...

पुरखा के सुरता – मेहतर राम साहू जी

पुरखा के सुरता छत्तीसगढ़ मा स्वाभिमान ल जगाए बर गांव-गांव मा जा के छत्तीसगढ़ी भाखा मा सब विधा ला जोरे...

पुत्र मयंक विश्वकर्मा की चार पुस्तकें प्रकाशित हुईं

यह शाश्वत सच है कि बच्चों की उपलब्धि से माता-पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। हमारे दो...

जनकवि कोदूराम “दलित” जी की हिन्दी कविता –

"गरीबी, तू न यहाँ से जा" गरीबी ! तू न यहाँ से जा एक बात मेरी सुन पगली, बैठ यहाँ...

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