October 22, 2026

साहित्य

एक पुरानी मेरी अपनी सबसे पसंदीदा ग़ज़ल

जज़्बात ग़ज़ल संग्रह से कौन है जो बुरा नहीं होता, शख़्स कोई ख़ुदा नहीं होता। बात कुछ तो ज़रूर होगी...

दैनिक नवप्रदेश में आज छपी मेरी व्यंग्य रचना “नई पीढी बिगड़ गई है”

व्यंग्य रचना : नई पीढ़ी बिगड़ गई है । डॉ किशोर अग्रवाल किनकिनाती ठंड में कांपते गजोधर को बड़ी राहत...

राजी सेठ आज इस संसार से विदा हो गयीं…

राजी सेठ आज इस संसार से विदा हो गयीं... चुपचाप... बहुत मिलना चाहा...मिलना संभव नहीं हुआ... पहले वो जब भी...

वे आज भी मौज़ूद हैं अपनी रचनाओं में

( आलेख : स्वराज करुण ) छत्तीसगढ़ के सामाजिक ,सांस्कृतिक साहित्यिक और राजनीतिक इतिहास पर लोग आज जो कुछ भी...

आप भी हुज़ूर औघड़ हो और मामूली औघड़ नहीं…

आप भी हुज़ूर औघड़ हो और मामूली औघड़ नहीं, पूरे सिद्ध औघड़। हम लोग गोरखपुर गए थे फिर वहाँ से...

अभिनय में मैं धर्मेंद्र का फ़ैन नहीं रहा…

उनसे दो बार मिलना हुआ। एक बार 1980 में जयपुर के क्लार्क्स आमेर होटल में, जब वे — हेमा मालिनी...

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