फलक़ पर मुस्कुराती …
फलक़ पर मुस्कुराती बिजलियाँ कुछ और कहती हैं ज़मी पर लड़खड़ाती कश्तियाँ कुछ और कहती हैं बया करते हैं दरवाज़े...
फलक़ पर मुस्कुराती बिजलियाँ कुछ और कहती हैं ज़मी पर लड़खड़ाती कश्तियाँ कुछ और कहती हैं बया करते हैं दरवाज़े...
(समीना खान/ Sameena Khan) ‘सफर में इतिहास’ किताब हाथ में आई तो ख्यालात का एक न थमने वाला सफर साथ...
डॉ रामविलास शर्मा नाम हिंदी के श्रेष्ठ आलोचकों में लिया जाता है।उनके विपुल आलोचनात्मक लेखन में विषयों की विविधता है।मानविकी...
वे जहां कहीं चले जाते हैं वहीं छोड़ जाते हैं शरीर से उठती गंध वही अंतिम गंध जिसमें उनके पसीने...
मनुष्य गिर जाता है भाषा अकेली नहीं गिरती उसके साथ गिर जाती है मनुष्यता की समूची विरासत कहते हैं कवि...
बासठ वर्ष की उम्र में यह आखिरी बार था जब दादी पेड़ पर चढ़ तो गईं, लेकिन उतर नहीं पाईं...
मुक्तिबोध की कविताएं गहन रूपकात्मकता में आधुनिक मनुष्य के अंतर्द्वंद्व,उसकी पीड़ा, संघर्ष को प्रकट करती हैं।उनके यहां वैचारिक अंतर्द्वंद्व अत्यधिक...
प्रकृति-सौंदर्य के कुशल चितेरे, छायावाद के प्रमुख स्तंभ कवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती पर कुछ अरुण-दोहे : पतझर जैसा हो...
हिंदी साहित्य एवम व्यंग्य संस्थान रायपुर, छत्तीसगढ़ “हिंदी व्यंग्य के लिए राष्ट्रीय स्तर”के निम्न पुरस्कार हेतु अनुशंसाएँ आमंत्रित करता है...
मैं फ़ेसबुक पर सुशोभित जी के लेख पढ़ता रहता हूँ बहुत ही उम्दा लिखते है। इनके लेखन ने हर बार...