ग़ज़ल
सफ़र में हूँ सफ़र पहचानता हूँ मैं रहबर की नज़र पहचानता हूँ मेरी आँखों पे पट्टी बाँध देना मैं फिर...
सफ़र में हूँ सफ़र पहचानता हूँ मैं रहबर की नज़र पहचानता हूँ मेरी आँखों पे पट्टी बाँध देना मैं फिर...
चांद से टूटा नाता मेरा नही उतरे सखी मेरे अंगना. गुमसुम पड़ा है करवा मेरा छलनी भी है बड़ी उदास...
--------------- //1// महिला मन ला आत्मनिर्भर बनाय बर सरकार ह बोलत हे। बजार बनाके दिस अब उही जगा में दारू...
हैं चरण,पर आचरण तो भ्रांत है, घोषणा उसकी, कि वह संभ्रांत है। धर्म का परिदृश्य, क्यों ऐसा हुआ! रक्त रंजित...
विधा- सम मात्रिक छंद विधान- चार पद,प्रत्येक पद 16-16 मात्राएँ, युगल पद तुकांत, पदांत ऽऽ विकल्प ऽ।।,।।ऽ या ।।।। मान्य,...
1222--1222--1222--1222 काफ़िया - उठाते रदीफ़ - हैं नहीं किरदार है ऐसा जो गिरते को उठाते हैं। कहाँ इंसानियत कोई बची...
मैं... गोबर-माटी से लिपी-पुती देहरी तुम... आटे, हल्दी, रोली से बने खुशियों की रंगोली मैं... आँगन के बीचों-बीच तुलसी का...
आंख से कोई पर्दा उठा ही नहीं जो तमाशा था होना हुआ ही नहीं इश्क़ तो बस वो पहले पहल...
क्या आप पहचान सकते हैं कि भवानी प्रसाद मिश्र की कविता के ये चार कौए कौन हैं...कविता पुरानी है, लेकिन...
अदाएँ तुम बना लेना इशारे मैं बनाऊँगा तुम्हारे फूल-जज़्बों को शरारे मैं बनाऊँगा तुम्हारा साथ शामिल है तो फिर तुम...