पसंद का मोहल्ला
सच दरअसल वह नहीं है जिसे हमने अपनी पसंद के लिफ़ाफ़े में बंद कर रखा है। पसंद तो एक पुरानी...
सच दरअसल वह नहीं है जिसे हमने अपनी पसंद के लिफ़ाफ़े में बंद कर रखा है। पसंद तो एक पुरानी...
उसके स्वप्नों को जानना आसान नहीं ! उसकी इच्छाओं द्वारा निर्देशित, इन स्वप्नों में कथा पात्र जुड़ जाते हैं नए।...
सेतु प्रकाशन दिल्ली ’तारा’ संजीव बख्शी का नवीनतम उपन्यास है। पिछले वर्ष ही उनके दो उपन्यास ’ढाल चंद हाजिर हो’...
तो फ़रवरी जा रहे हो तुम… कैलेंडर की दीवार से उतरते हुए जैसे कोई महीना नहीं, एक अनकहा संवाद विदा...
कितनी बदल चुकी है दुनिया भावना, संवेदना, सम्मान,, सबको कुचलती हुई बेलगाम राजनीति , और इसके कुचक्रों में फंसे लोग,,...
गणतंत्र की शक्ति बख़्तरबंद गाड़ियों से नहीं मापी जाती न ही बन्दूकों, विषों, या ग़ायब कर दिये जाने से। गणतंत्र...
टपक रहा छप्पर से पानी वह निर्मम बरसात लिखो। लिखो कहानी फिर हल्कू की पूस ठिठुरती रात लिखो। सिसक रही...
भरोसा था जिसपे दग़ा दे रहा है ये रहज़न नहीं रहनुमा दे रहा है जिसे देखो वो मशवरा दे रहा...
मैं चुपचाप खडा रहा दरवाज़े पर सिर टिकाए रोशनी, धूल और धुएं की तरह; मैं भी आना चाहता था घर...
कम-उम्र बदन से छरहरी लाई वसंत फिर, फरवरी। शायर कवियों का दिल लेकर शब्दों का मलयानिल लेकर गाती है करमा...