प्रतिभाशाली स्त्रियां
प्रतिभाशील स्त्रियों ने
स्वयं को निपुण किया
चौसठ कलाओं में,
उनका प्रबंधन श्रेष्ठ था इतना कि
कार्यालय में डाटा एनालिसिस
से लेकर चाय कितनी देर में ख द क
जाएगी उसका परफ़ेक्ट संयोजन करती थीं।
समाजशास्त्र अंतरिक्ष विज्ञान यहाँ तक वेदाध्ययन में भी
उन्होंने कौशल विकसित किया अपना।
उनके एक स्पर्श से पुरुषों में
जिजीविषा जागती थी,
लेकिन जब प्रेम की पहल होती
तो उन्हें परखा जाता,
कभी वह ऊँची आवाज़ में तो नहीं बोलेंगी
कभी अपने कौशल से आगे तो नहीं निकल जायेंगी
त्याग के समय कोई
प्रश्न तो नहीं पूछेंगी
समर्पण का लेखा तो नहीं माँगेंगी
माथे पर हाथ फिराते वक्त वही महसूस करेंगी ना
जो पिछली प्रेमिका ने किया था
तर्क की बात जब होगी
तब कहीं हमारी अपूर्णता प्रदर्शित नहीं होगी ना!
दरअसल प्रतिभाशाली स्त्रियों को प्रेम से सिक्त नहीं किया गया,
हर समय उन्हें तौला जाता रहा
वो प्रेमी की समस्त कसौटी पर खरी ही नहीं उतर पा रही थी।
सांत्वना श्रीकांत