बाढ़ बहुत है, मिलजुलकर ही नदी पार करना होगा…
बाढ़ बहुत है, मिलजुलकर ही नदी पार करना होगा
आने वाले हर खतरे पर हमें वार करना होगा
दूर तलक तूफ़ां हैं, अब तो राहें भी आसान नहीं
फिर भी अपने हर सपने से हमें प्यार करना होगा।
बात-बात पर बिखरेंगे तो कैसे बन पाएगा घर
अपने रिश्तों में थोड़ा तो अब सुधार करना होगा।
दीवारें ऊँची हैं बेहद पर वे छोटी हैं मन से
हर दिल को खिड़की के संग में एक द्वार करना होगा।
हारे हुए किसी पल में भी कोई दीपक जलता है
उसी उजाले से आगे का नव सुधार करना होगा
लोग कहेंगे चिढकर खुद पे क्यों यकीन करता है तू
हँस कर उस बंदे से भी तो हमें प्यार करना होगा
है सुधीर की रग-रग में ही समझो फ़ितरत फौलादी
हर तूफ़ां से लड़ कर पतझर को बहार करना होगा।