October 22, 2026
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आज ही के दिन अमृता प्रीतम की जन्म शताब्दी वर्ष पर ‘डायलॉग’ में पढ़ी गई एक कविता-

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तुम आना अमृता
एक बार फिर आना
या कि बार-बार आना
करने प्रेम का निरूपण

कि न बन पाए कोई स्त्री
पहले दूसरे तीसरे प्रेम पर
किसी की फब्तियों का हिस्सा

तुम आना अमृता
सिखाना उन्हें प्रेम की परिभाषा
जो अनभिज्ञ हैं प्रेम के दर्शन से

तुम आना अमृता
देना उन्हें एक ऐसी दलील
जो देते रहे हैं प्रेम के नाम पर हिदायतें

कि नहीं है
प्रेम की कोई नियत परिभाषा
न ही उम्र का कोई दायरा तय

तुम आना अमृता
बताना उन्हें कि प्रेम नसीहतों का नहीं
उससे परे का मसला है।

Mamta Jayant

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