साहित्यिक तर्पण -पुरखा के सुरता
स्व.श्री हेमनाथ यदु जी
🌹सादर नमन जोहार🌹
अपन बेरा के बड़का साहित्यकार अउ गीतकार स्व.श्री हेमनाथ यदु जी जेखर जनम ०१ अप्रैल १९२४ के महामाई पारा रायपुर म होय रिहिस। आप मन के ददा के नाव श्री बृजलाल यदु जी रिहिन।स्व.यदु जी बड़ सरल सहज सुभाव के धनी रिहिन। आप मन छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग के सेवा बजावत साहित्य सृजन म बहुंते योगदान देइन,जेन ह हमर छत्तीसगढ़ राज क्रांतिकारी साहित्यकार स्व.श्री हरि ठाकुर जी संग म संपादक के कारज करे हव।जेमा हमर छत्तीसगढ़ राज बर अनमोल धरोहर हीरा हवै,आप मन के गीत संग्रह नवा सुरुज के अगवानी अपन बेरा म बहुंते नाव कमाए हे। आप मन के साहित्य सृजन ले हमर छत्तीसगढ़ राज के साहित्य म बड़ योगदान हवै।स्व श्री हेमनाथ यदु के लिखे छत्तीसगढ़ी गीत गीत सादर प्रस्तुत हे….
जय जय हो जय मोर देस के धरती मइया,
तोरेच दल में गरजत हावन खात खेलत बहिनी भइया,
जय जय हो जय मोर देस के मोर धरती मइया।
बजुर बरोबर अड़े माथ में छाती अड़ा हिमालय,
गंगा जमुना निरमल धारा सब के जीव जुड़ावय,
विध्य सतपुड़ा बने करधनी कनिहा गजब सुहावय,
महानदी कृष्णा कावेरी गोदावरी मन भावय,
ब्रह्मपुत्र नरमदा तापती ठंव ठंव नांव जगावय,
चारो खुंट में चार धाम के घर घर दरस देवइया,
जय जय हो जय मोर देस के मोर धरती मइया।
आप मन के संजोए अनमोल धरोहर संग्रह…..
०१. सुमन संचय (सह संपादक)
०२. पसर भर अंजोर (संपादन)
०३. सोन चिरैया (गीत संग्रह)
०४. सुंदरकांड (छत्तीसगढ़ी रामायण)
०५. किष्किन्धाकाण्ड (छत्तीसगढ़ी रामायण)
०६. सुआ गीत ( संकलन)
०७. नवा सुरुज के अगवानी (गीत संग्रह)
आप मन लेखक अउ सहयोगी साहित्यकार के संग म प्रकाशन के कृतियां…….
१.नये स्वर ०१ -संपादक- श्री हरि ठाकुर जी
२.नये स्वर ०२ -संपादक -श्री हरि ठाकुर जी
३.नये स्वर ०३ -संपादक- श्री नंद किशोर तिवारी जी
४.गीतों के शिलालेख-संपादक- श्री हरि ठाकुर जी
५.नये विश्वास के बादल- श्री हरि ठाकुर जी
६.लोहे का नगर- संपादक-श्री हरि ठाकुर जी
७.कुंजबिहारी चौबे के गीत (छत्तीसगढ़ी) संपादक श्री हरि ठाकुर जी
८.सुआ गीत (संकलन छत्तीसगढ़ी) संपादक श्री हेमनाथ यदु जी
९.सुंदरकाण्ड (छत्तीसगढ़ी) संपादक श्री हेमनाथ यदु जी
१०.किष्किन्धाकाण्ड (छत्तीसगढ़ी) संपादक श्री हेमनाथ यदु जी
११.रायपुर नगर के इतिहास-संपादक-श्री हरि ठाकुर जी
१२. छत्तीसगढ़ के रत्न-संपादक-श्री हरि ठाकुर जी
१३. संझौती के बेरा (छत्तीसगढ़ी) संपादक श्री लखन लाल गुप्ता जी
१४. छत्तीसगढ़ी साहित्य का ऐतिहासिक अध्ययन- संपादक श्री नंद किशोर तिवारी जी।
चल सहर जातेन रे भाई (चंदैनी गोंदा गीत)
चल सहर जातेन रे भाई गांव ला छोड़ के सहर जातेन ।
ढकर ढकर पसिया पीके, कमई करे जाथन बइला भंइसा कस कमाथन, गांव मां दुख पाधन दुख ला हरे जातेन रे भाई ..।
माड़ी भरके चिखला हावय रद्दा किचकिच लगथे माड़ी ऊपर धोती उघारत अडबड लाज लगथे चिक्कन चिक्कन रेंग तेन रे भाई .. ।
टिमटिम टिमटिम दिया करे, धुंगिया आँखी भरथे डर लागथे कोलिहा के बोली, हुवां हुवां जब करथे बिजली बत्ती बारतेन रे भाई .. ।
– हेमनाथ यदु
चंदैनी गोंदा के लोकप्रिय गीत-चल शहर जातेंन रे भाई
संकलन- मिनेश साहू
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