कविता साहित्य जब दीप बुझे आना… Chhattisgarh Mitra October 1, 2025 0 जब दीप बुझे आना, जब दिल जले आना, वादे सारे भूलकर तुम बस चले आना,,, बेबहर से जीवन मेंं मेरे तुम कोई बहर बन आना,,, आस के जगनुओं को बुलाया है मैंने उनके उड़ने से पहले चले आना,,, तुम आना तो उम्मीद साथ ले आना, शायद जले उससे कोई बुझी लालटेन,,,, शुचि ‘भवि’ भिलाई, छत्तीसगढ़ Post navigation Previous: मिथकों से विज्ञान तकNext: राज्यपाल ने विजयादशमी पर्व की दी शुभकामनाएं More Stories आलेख साहित्य किसान पुत्र:दाऊ चतुर सिंह चन्द्रवंशी Chhattisgarh Mitra August 9, 2026 0 आलेख साहित्य श्रीनिवास विनायक कुलकर्णी (‘श्रीवि’) : मराठी के अत्यंत संवेदनशील ललित लेखक, कवि, कथाकार तथा संपादक के रूप में प्रतिष्ठित रहे Chhattisgarh Mitra August 9, 2026 0 कविता साहित्य सावन ने प्रेम लिखा है Chhattisgarh Mitra August 9, 2026 0 Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.