सुरों के साधक, पंडित छन्नूलाल मिश्र
भारतीय शास्त्रीय संगीत का आकाश आज एक चमकते सितारे के अस्त होने से शोकाक्त है।
विश्वविख्यात शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी का आज दशहरे के दिन वाराणसी में निधन हो गया। 91 वर्ष की आयु में उनका चले जाना संगीत साधना की एक पूर्ण लहर के विसर्जन जैसा है।
पंडित जी ने अपनी बुलंद और भावपूर्ण आवाज से शास्त्रीय संगीत और ठुमरी को एक नया आयाम दिया। बनारस घराने की इस विरासत को उन्होंने न सिर्फ़ सहेजा, बल्कि दुनिया भर में उसे गौरवान्वित किया। उनकी आवाज़ में सुरों का जो जादू था, वह श्रोताओं को सीधे हृदय तक छू लेता था।
यह कोई संयोग नहीं कि उन्होंने दशहरे के इस पावन दिन अंतिम साँस ली। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, और पंडित जी ने अपने संगीत से सद्भाव और सौंदर्य की जो विजय पताका फहराई, वह सदैव फहराती रहेगी।
हम एक महान साधक को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनका शरीर हमारे बीच नहीं रहा, किंतु उनके सुर, उनकी ठुमरियाँ और उनकी साधना का प्रकाश सदैव हमारे बीच जगमगाता रहेगा।
शांति और संगीत की इस अनंत यात्रा में, वे सदैव अमर रहेंगे।
●●● जयप्रकाश मानस