March 6, 2026
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जयप्रकाश मानस
कुछ रंग बचे, कुछ रूप
कुछ डाल बचे, कुछ पात
बची कुछ धूप, बचे कुछ कूप।

कुछ शब्द बचे, कुछ व्याकरण
कुछ संधि बचे, कुछ समास
बचा कुछ मौन, बचे कुछ उदाहरण।

कुछ घर बचे, कुछ परछी
कुछ राह बचे, कुछ राहगीर
बची कुछ बस्ती, बची कुछ मस्ती।

कुछ नदी बचे, कुछ नाव
कुछ डोंगची बचे, कुछ पतवार
बचे कुछ तट, बचे कुछ गाँव।

कुछ बीज बचे, कुछ खेत
कुछ गाय बचे, कुछ बैल
बचा कुछ वैशाख, बचा कुछ चैत।

और जब कुछ भी न बचे
न रंग, न रूप, न गीत
बचे केवल एक यही – बचने की ज़िद, बचाने की रीत।

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