मिली कैसे रविवार की छुट्टी !
कहते हैं मुग़लों के शासन-काल में भारतीय कामगारों को शुक्रवार के दिन छुट्टी दी जाती थी ।
बदमाश अँगरेज़ों ने इंग्लैंड के कामगारों को तो रविवार के दिन छुट्टी दे रखी थी लेकिन भारत के कामगारों से वे सप्ताह के सातों दिन हडतोड़ मिहनत कराते थे । वे भारतीयों से हफ्ते के सातों दिन, बिना रुके, अपनी पसीने की एक-एक बूंद निचोड़ देते थे। ब्रिटिश शासन में उनके लिए कोई साप्ताहिक अवकाश नहीं था
तब सामने आये ‘सत्यशोधक आंदोलन के एक कार्यकर्ता – उन्होंने अँगरेज़ी हुकूमत के साथ बहुत लिखा-पढ़ी की । लेकिन अँगरेज़ कहाँ सुनने वाले थे !
आख़िर उस कार्यकर्ता ने आंदोलन छेड़ दिया ।
यह लड़ाई 2-4 दिन नहीं पूरे 8 साल तक चलती रही । अंतत: ब्रिटिश हुकूमत को झुकना पड़ा और 1889 में आज ही के दिन ‘रविवार की छुट्टी’ का ऐलान करना ही पड़ा ।
जुझारू कार्यकर्ता नारायण मेघाजी लोखण्डे को सलाम !
●●● जयप्रकाश मानस