March 6, 2026
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जयप्रकाश मानस

हस्ती चढ़िए ज्ञान कौ, सहज दुलीचा डारि
स्वान रूप संसार है, भूँकन दे झक मारि ।

[ कबीर कह गये हैं : ज्ञान रूपी हाथी पर सवार हो जाओ, यानी आत्म-बोध, विवेक और भीतर की जागृति को अपना आधार बना लो।

जब व्यक्ति ज्ञान के ‘हाथी’ पर चढ़ जाता है, तब उसका चलना भी ऊँचा और स्थिर हो जाता है; वह छोटी-छोटी बातों में नहीं उलझता। इस अवस्था में संसार की नुक्ताचीनी, आलोचना या तुच्छ व्यवधान ‘कुत्ते के भौंकने’ की तरह हो जाते हैं— जिस पर ध्यान देने और अपनी दिशा बदलने की कोई ज़रूरत नहीं। ]

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