राष्ट्रीय पक्षी दिवस (5 जनवरी )पर
नील गगन के प्यारे पंछी
उड़ते कितने सारे पंछी
पेड़-गगन हैं इनकी दुनिया
दिखते जहाँ हमारे पंछी
इनको कभी तंग मत करना
सबके बड़े दुलारे पंछी
बच्चों को कितने भाते हैं
उनके जैसे न्यारे पंछी
मत काटो पेड़ों को अपने
बारम्बार पुकारे पंछी
मन बोझिल है आकर फौरन
कोई गीत सुना रे पंछी
देख शिकारी आया कोई
फौरन तू उड़ जा रे पंछी
@ गिरीश पंकज