March 6, 2026
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वासंती संदली बयार बही
मेरु पर्वत दीप्त हुआ

तुम मिली तो,
ठूंठ पर दो कोमल हरे पत्ते निकल आए
रेत में सावन के फूल खिले

तुम मिली तो,
धूप को बादल ने आंचल में लपेट लिया
धरती के ओंठ गीले हुए

तुम मिली तो,
स्वर पुनः कंठ से फूटे
पी कहां पी कहां पपीहा के
सखि कहां कूजती कोयल

तुम मिली तो,
हल हुआ ऋतुओं का बीजगणित
तीन से छह हुए मौसम

तुम मिली तो,
रस घट फूट गया किसी पके कपास के फल जैसा
पात पात पुलक उठे

तुम मिली तो,
मुग्ध मन हुआ
सांस में मधुमास बसा
शब्दों में अर्थ भरे

तुम मिली तो,
जिंदगी मुस्कुराई है।

(प्रेमी का प्रेमिका के लिए पत्र)
सांत्वना श्रीकान्त

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