नज़र कमज़ोर हो गई…
नज़र कमज़ोर हो गई…
दूर का नहीं दीखता साफ
मन पटल पर कुछ दृश्य धुंधलाए से हैं
नज़र कमज़ोर हो गई …
शब्दों की सूईंयों में नहीं पिर रही भावनाएं…
डायरी के पृष्ठों पर
उधड़ी पड़ी हैं कुछ कविताएं,
नज़र कमज़ोर हो गई
संयम की ऐनक न हो तो
भावातिरेक में लिखी कविताएं
भीग-भीग जाती हैं
कुछ लिख भेजो तो स्पष्ट लिखना
अस्पष्टता भ्रमित कर देती है अब
…
नज़र कमज़ोर जो हो गई
🌿 बुशरा