March 6, 2026
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नज़र कमज़ोर हो गई…
दूर का नहीं दीखता साफ
मन पटल पर कुछ दृश्य धुंधलाए से हैं

नज़र कमज़ोर हो गई …
शब्दों की सूईंयों में नहीं पिर रही भावनाएं…
डायरी के पृष्ठों पर
उधड़ी पड़ी हैं कुछ कविताएं,

नज़र कमज़ोर हो गई
संयम की ऐनक न हो तो
भावातिरेक में लिखी कविताएं
भीग-भीग जाती हैं

कुछ लिख भेजो तो स्पष्ट लिखना
अस्पष्टता भ्रमित कर देती है अब

नज़र कमज़ोर जो हो गई

🌿 बुशरा

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