October 23, 2026

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कुछ अरुण-दोहे : पतझर जैसा हो गया, जब ऋतुराज वसंत।अरुण! भला कैसे बने, अब कवि कोई पंत।। वृक्ष कटे छाया...

फ़लस्तीनी पहचान और महात्मा गाँधी

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