अक्षरों से संवादरत विजय राठौर…..
डा.चित्तरंजन कर बुदबुदाते हैं " कविता मनुष्य चेतना की शिखर यात्रा है।" जीवन भले ही तिमिरावृत हो । " रात...
डा.चित्तरंजन कर बुदबुदाते हैं " कविता मनुष्य चेतना की शिखर यात्रा है।" जीवन भले ही तिमिरावृत हो । " रात...
इस हवा में लग रहा है, बर्फ मिश्रित है। कल तलक बरसात झेली, शीत की अब मार है। खेल मौसम...
तिरानवे साल की ज़िन्दगी में 77साल की साहित्य -साधना *** (आलेख - स्वराज करुण ) जिन्होंने 93 साल की अपनी...
फूल, पत्ती,जड़ और तना इन अंगों से वृक्ष बना किसी वृक्ष के फल बेहतर फूल किसी पर हैं सुंदर. इन...
जाड़ पूस के गजब जनाथे, जिवरा जाथे काँप। किनकिन किनकिन ठंडा पानी, लागे जइसे साँप। सुरुर सुरुर बड़ चले पवन...
इक दिन हम सब लोग मिलेंगे मिट्टी में । लेकिन मिलकर हमीं खिलेंगे मिट्टी में ।। मिट्टी है अनमोल,इसे उर्वर...
जज़्बात ग़ज़ल संग्रह से कौन है जो बुरा नहीं होता, शख़्स कोई ख़ुदा नहीं होता। बात कुछ तो ज़रूर होगी...
व्यंग्य रचना : नई पीढ़ी बिगड़ गई है । डॉ किशोर अग्रवाल किनकिनाती ठंड में कांपते गजोधर को बड़ी राहत...
आज और कुछ देर यूँ ही शोर मचाए रखिए। आसमाँ है तो उसे सर पर उठाये रखिए। उँगलियाँ गर नहीं...
राजी सेठ आज इस संसार से विदा हो गयीं... चुपचाप... बहुत मिलना चाहा...मिलना संभव नहीं हुआ... पहले वो जब भी...