April 24, 2026

साहित्य

व्यंग्य के तीर चलाने में सुदक्ष और कुशल : व्यंग्यरत्न हँसमुख वीरेन्द्र सरल

कृष्ण कुमार अजनबी 14 जून 1971 को तत्कालीन मध्यप्रदेश और वर्तमान में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के अंतर्गत बोडरा ग्राम...

युद्ध सिर्फ़ सरहदों पर नहीं होते

ज़मीन को चाहे किसी भी पैमाने से माप लो उसका बँटवारा कभी नहीं होता सम-तुल्य। कहीं मौसम रंग बदल लेंगे,...

पुरखा के सुरता – मेहतर राम साहू जी

पुरखा के सुरता छत्तीसगढ़ मा स्वाभिमान ल जगाए बर गांव-गांव मा जा के छत्तीसगढ़ी भाखा मा सब विधा ला जोरे...

जनकवि कोदूराम “दलित” जी की हिन्दी कविता –

"गरीबी, तू न यहाँ से जा" गरीबी ! तू न यहाँ से जा एक बात मेरी सुन पगली, बैठ यहाँ...

लोकपर्व लोककला … “ दीवारों पर खिलते स्वप्न और प्रार्थनाएँ”

साँझी लोकपर्व मुख्यतः उत्तर भारत, हरियाणा, पंजाब राजस्थान ,दिल्ली के कुछ हिस्सों में और विशेषकर ब्रज क्षेत्र में मनाया जाता...

सुरता सुशील यदु : “बहुरंगी काव्य के सुकवि सुशील यदु”

छत्तीसगढ़ की उर्वरा माटी ने अनेक काव्य-रत्नों को जन्म दिया है। अस्सी के दशक में छत्तीसगढ़ी साहित्य के गगन पर...

तुम भी रखना पाँव मेरे गाँव –

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' क्वीन्स, न्यूयार्क के पुस्तकालय में वह मुस्कराते पढ़ रही थी और मैं पूछता कि पत्रिका मेरी...