मोड़ ऐसा भी मोहब्बत…
मोड़ ऐसा भी मोहब्बत में कभी आएगा दिल में रहता है जो वो दिल से उतर जाएगा यूँ तो हर...
मोड़ ऐसा भी मोहब्बत में कभी आएगा दिल में रहता है जो वो दिल से उतर जाएगा यूँ तो हर...
अंबर पथ से आती वर्षा। धरा हृदय सहलाती वर्षा। छम-छम बूँदें नाच रहीं हैं, सबका मन बहलाती वर्षा। घनन- घनन...
■ शहंशाह आलम ग़ज़ब है भादों, जो मेरे घर को आधा पानी आधा घर दिखा रहा था हावड़ा वाले पुल...
जब मैंने तुझसे प्रेम करने से पहले ही नहीं पूछा तो क्यों कर पूछती भला ..? कोई भी वजह प्रेम...
*** मेरा गांव गांव के लोग गांव की मिट्टी गांव की हरीयाली गांव का खेत खलिहान गांव का हर कोना...
-------------------------------- कविता / डॉ. वागीश सारस्वत हाँ, मैं तुमसे प्यार करता हूँ तुम भी बखूबी जानती हो ये बात जान...
कविता को धैर्य पूर्वक पढ़ सकने का समय दे सकें तो पढ़े। कविता विस्तारित है किंतु , स्त्री मन की...
क्रांति का सुलगता गीत थे तुम स्वातंत्र-समरांग के संगीत थे तुम तेजाब बनकर आंख में अंगार के शोले जगाए दुश्मनों...
हरे को और हरा करती , नम को और नम करती, एकांत को और गाढ़ा करती स्मृतियों की धार को...
अभी-अभी मैंने हरसिंगार को खिलखिलाते देखा अभी-अभी मैंने एक नदी को अठखेलियाँ करते हुए समंदर की ओर बहकर जाते देखा...