चार कौए उर्फ चार हौए
क्या आप पहचान सकते हैं कि भवानी प्रसाद मिश्र की कविता के ये चार कौए कौन हैं...कविता पुरानी है, लेकिन...
क्या आप पहचान सकते हैं कि भवानी प्रसाद मिश्र की कविता के ये चार कौए कौन हैं...कविता पुरानी है, लेकिन...
अदाएँ तुम बना लेना इशारे मैं बनाऊँगा तुम्हारे फूल-जज़्बों को शरारे मैं बनाऊँगा तुम्हारा साथ शामिल है तो फिर तुम...
ट्राम हमारे लिए उतने ही ज़रूरी थे जितना ज़रूरी था हमारे लिए राशन, ट्राम के बिना जीवन की कल्पना की...
(आजादी के तुरंत बाद की रचना) कवित्त (1) श्रम का सूरज उगा, बीती विकराल रात, भागा घोर तम, भोर हो...
कविता बंग्ला मूल के कवि सुनील गंगोपाध्याय की है जिसे हिन्दी में हम तक पहुंचाने का जिम्मा जिस ईमानदारी से...
जब आधी दुनिया स्त्रियो की तो आधी मुसीबत भी होन्गी ही!, उनके लिए तिलमिलाहट क्यूँ! किशोर होते पुरूष का भी...
काल अवधि समय सब से परे हिमखंड में हिम थे थमे चंद्र देती थी शीतल लहरियां बयार में जोशना थे...
मोर संग चलव रे, वा रे मोर पँड़की मैना, धनी बिना जग लागे सुन्ना, चौरा मा गोंदा रसिया, बखरी के...
मुझे तुम्हारे होंठ पसंद हैं जब वे शराब से भीगे होते हैं और जंगली चाहत से लाल होते हैं। मुझे...
बरसों-बरस की यात्रा में क्या पाया लड़की? स्वयं से चली कितना पहुँची स्वयं तक जान पाई क्या चाहती है क्यों...