सभी को छोड़ के…
सभी को छोड़ के, खुद पर भरोसा कर लिया मैंने. वो मैं, जो मुझ में मरने को था, ज़िंदा कर...
सभी को छोड़ के, खुद पर भरोसा कर लिया मैंने. वो मैं, जो मुझ में मरने को था, ज़िंदा कर...
कविता लिखने के लिए, आज छुट्टी ले ली है, दिन भर बिस्तर पर, कविता - अविता चली, बिस्तर में लेटकर,...
मृत्यु जब मेरे सिरहाने खड़ी होगी... जब किसी दिन मृत्यु मेरे सिरहाने खड़ी होगी मुझे वास्तव में डरा रही होगी...
रो कर हंसना ही नाम जिंदगी, क्षण-क्षण संघर्ष नाम जिंदगी । नित-नित चलना - रुकना, सफल- असफल नाम जिंदगी ।...
चारों ओर सन्नाटा पसरा और अंधियारी छाई है, क्रूर कोरोना ने मेरे भैया अपनी धूम मचाई है । और उग्र...
मिला मानव जीवन सबको, नेक कर्म में सभी लगाएं।। त्याग मोह माया, द्वेष भाव, प्रभु भक्ति में रम जाएं।। मंदिर...
तुम लौट आओ....! तुम्हारे आने से, गुनगुनायेंगी खिड़कियां, महक जाएगा घर का कोना- कोना। कहां बैठे हो..! धूप को लपेटकर,...
विधा – कविता टूट रहीं हैं परतें विश्वास की दरक रहें है पहाड़ चोट खाकर बातों के भूकंप से ही...
हमारी पीढ़ी, जिसने युग को करवट लेते देखा है अपने पैरों चलकर जिसका स्वागत किया है, अभिभूत है ईश्वर की...
आओ हम सब नव वर्ष का स्वागत करते हैं। बीत गया वो साल पुराना जिसमे थी अंधियारी । कोहराम मचा...