दिव्या सक्सेना की दो कविताएं
भावों की गहनता में भावों की गहनता में कोई इतना डूब जाए और लिख दे उन्हें कलम उठाकर पन्नों पर...
भावों की गहनता में भावों की गहनता में कोई इतना डूब जाए और लिख दे उन्हें कलम उठाकर पन्नों पर...
जनकवि नागार्जुन स्मारक निधि, नई दिल्ली के निर्णायक मण्डल की ओर से वर्ष 2020 का 'जनकवि नागार्जुन स्मृति सम्मान' प्रख्यात...
मैं हमेशा सफ़र पर होती और वह हमेशा स्टेशन पर आधी रात, भोर या दिन-दोपहर हर बार वह मिलता मुझे...
दिन आए फिर तरह- तरह से ठंड भगाने के आंख, नाक को छोड़ सभी अंग बंद कर जाने के मन...
विधा - गीत सुनसान डगर जीवन के मेलें शूल-धूल बवंडर के नित्य रेलें उठते शुष्क मरू हृदय धरा पर बिखर...
प्रिय भारत! शोध की खातिर किस दुनिया में ? कहां गए ? साक्षात्कार रेणु से लेने ? बातचीत महावीर से...
हे ईश्वर ! मैं निज स्वार्थ को मिटा दूं । इस दुनिया में प्रेम का दीप जला दूं ।। लेकर...
मिमी' मूवी देखने के बाद मां और मां की ममता पर जो विचार आये,मैंने 'मिमी' की स्क्रिप्ट पर मां की...
चल रे वैरागी मन दीपावली मनाते हैं, चल रे वैरागी मन,दीप जला कर आते हैं । राम-लखन जब घर को...
आओ फिर से दिए जलाएं। मिलकर तम को दूर भगाएँ। आडम्बर, प्रपंच, पाखण्ड से हरदम दूर रहें हम । ईर्ष्या,...