असहमतियों और निर्मल वर्मा पर चर्चा…
जैसा कि आजकल देख, सुन और पढ़ रही हूँ अब हमारी प्रतिरोधक क्षमता ख़त्म होती जा रही है । कोई...
जैसा कि आजकल देख, सुन और पढ़ रही हूँ अब हमारी प्रतिरोधक क्षमता ख़त्म होती जा रही है । कोई...
देश में सामंती समाजों के अवशेष बीसवीं शताब्दी तक बने रहें। अब पूरी तरह खत्म हो गए हों ऐसा भी...
नसीरुद्दीन शाह केवल अदाकारी के कारण ही नसीर साहब नहीं बने बल्कि अपने एटिट्यूड के कारण भी यहां तक पहुंचे...
यह एक आलेख, जो कल राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित हुआ, आज विस्तृत रूप में यहांँ पढ़ा जा सकता है। –...
यह भारतीय रेल की उदारता थी जो मात्र पन्द्रह रुपये के टिकट में पन्द्रह स्टेशन दिखला देता है। सहयाद्रि पर्वत...
कोई कविता कुछ भी सिद्ध नहीं करती, सिवाय एक अनुभव को रचने के मैंने भी यही एक प्रयास किया है...
बुकर पुरस्कार से सम्मानित अरुंधति रॉय को निर्भीक और मुखर लेखन के लिए प्रतिष्ठित पेन पिंटर पुरस्कार से सम्मानित किया...
(डॉ. चेतन आनंद/Chetan Aanad) बात उस समय की है जब मैं आठवीं कक्षा में पढ़ता था. तब कविता लिखने का...
कल सुबह एक उपन्यास को पकड़ा और फिर ऐसा हुआ उस उपन्यास ने मुझे पकड़ लिया और तब छोड़ा जब...
डा. परदेशीराम वर्मा वीर शहीदों पर हम अपने समय के बड़े कवियों के लेखन में भी भावांजलियां कम पाते हैं।...