September 6, 2026

आलेख

गहरे भावबोध और करुणा के कवि : आशीष त्रिपाठी

मेरे नए कविता संग्रह 'शांतिपर्व' पर यह गंभीर और सुचिंतित टिप्पणी युवा अध्येता श्री अमित प्रभाकर Amit Prabhakar ने अपनी...

गुरुद्वारा श्री पत्थर साहिब

संदर्भ लेह-लद्दाख प्रवास हमने यहाँ मौन आध्यात्मिकता को अपने अंतर्मन में उतरते अनुभव किया। मेरे साथ चल रहे मित्र गिरीश...

लोकपर्व, लोकचित्र, लोककथा…

हमारी संस्कृति में जितनी विशिष्टताएँ मिलती हैं उतनी शायद ही अन्यत्र किसी संस्कृति में मिलती हों। हम पंचतत्वों के साथ...

मिर्ज़ा मसूद : उनकी आवाज ही उनकी पहचान थी

गिरीश पंकज मिर्ज़ा मसूद जी की काया 20 जुलाई को रायपुर में सुपुर्द-ए-खाक हो गई. 19 जुलाई को उनका इंतकाल...

गांव, रीतिरिवाज और परंपराएं

( प्रथम किस्त.....................बातें कुछ ज्यादा लम्बी है और विभिन्न विषयों पर है इसलिये इसे किस्तो में पोस्ट कर रहा हूं।...

लोक परंपरा के मोहक रूप ‘नगमत’

हमर छत्तीसगढ़ म सांस्कृतिक विविधता के अद्भुत दर्शन होथे. इहाँ कतकों अइसन परब अउ परंपरा हे, जेला कोनो अंचल विशेष...

असहमतियों और निर्मल वर्मा पर चर्चा…

जैसा कि आजकल देख, सुन और पढ़ रही हूँ अब हमारी प्रतिरोधक क्षमता ख़त्म होती जा रही है । कोई...