गहरे भावबोध और करुणा के कवि : आशीष त्रिपाठी
मेरे नए कविता संग्रह 'शांतिपर्व' पर यह गंभीर और सुचिंतित टिप्पणी युवा अध्येता श्री अमित प्रभाकर Amit Prabhakar ने अपनी...
मेरे नए कविता संग्रह 'शांतिपर्व' पर यह गंभीर और सुचिंतित टिप्पणी युवा अध्येता श्री अमित प्रभाकर Amit Prabhakar ने अपनी...
संदर्भ लेह-लद्दाख प्रवास हमने यहाँ मौन आध्यात्मिकता को अपने अंतर्मन में उतरते अनुभव किया। मेरे साथ चल रहे मित्र गिरीश...
हमारी संस्कृति में जितनी विशिष्टताएँ मिलती हैं उतनी शायद ही अन्यत्र किसी संस्कृति में मिलती हों। हम पंचतत्वों के साथ...
गिरीश पंकज मिर्ज़ा मसूद जी की काया 20 जुलाई को रायपुर में सुपुर्द-ए-खाक हो गई. 19 जुलाई को उनका इंतकाल...
अब दूर गगन में कहीं खो गया है सुबह 5 बजे मेरा मोबाइल बज रहा है पर मैं गहरी नींद...
( प्रथम किस्त.....................बातें कुछ ज्यादा लम्बी है और विभिन्न विषयों पर है इसलिये इसे किस्तो में पोस्ट कर रहा हूं।...
राचर एक दरवाजा होता है जो घर के बाहर घेरे से अंदर आने की जगह पर लगा रहता है। यह...
बात 1956 की है । मैं उस साल दिल्ली के लिए प्रस्थान कर रहा था क्योंकि लोकसभा सचिवालय में मेरी...
हमर छत्तीसगढ़ म सांस्कृतिक विविधता के अद्भुत दर्शन होथे. इहाँ कतकों अइसन परब अउ परंपरा हे, जेला कोनो अंचल विशेष...
जैसा कि आजकल देख, सुन और पढ़ रही हूँ अब हमारी प्रतिरोधक क्षमता ख़त्म होती जा रही है । कोई...