April 24, 2026

आलेख

आई हैवन्ट डाइड येट !!!

लन्दन की पार्लियामेंट स्क्वेयर पर टहलते हुए अचानक गांधी दिख गए। बेहद आश्चर्य हुआ। ब्रिटिश क्राउन का सबसे बड़ा ज्वेल-...

पहुना संग गोठ-बात : श्री मदन शर्मा – जिनके हाथ से ढोलक बोलता है

अस्मिता और स्वाभिमान के अगस्त अंक में आइये मिलते हैं... "चंदैनी-गोंदा" महान सांस्कृतिक लोकमंच के एक और सितारे से आज...

28 अगस्त पुण्यतिथि म सुरता : सोनहा बिहान के सपना ल जीवंत करइया कलावंत दाऊ महासिंह चंद्राकर

हमर इहाँ जब कभू छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक मंच के सोनहा बेरा के सुरता करे जाही, त सन् 1970 अउ 80 के...

भजन और गज़ल के बीच तिरती है आवाज़
प्रभंजय चतुर्वेदी की

भिलाई की अनेक प्रतिभाओं की विकास यात्रा में एक समय ऐसा भी आया जब एक आयु वर्ग के मित्र समूह...

राष्ट्रीय खेल दिवस पर विशेष : राज्य के युवा अब कह रहे – खेलबो, जीतबो, गढ़बो नवा छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में साढ़े तीन साल पहले मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में गठित सरकार ने "गढ़बो नवा छत्तीसगढ़" का...

साहिब बीबी और ग़ुलाम : गुरुदत्त(1962)

मानव सभ्यता के विकास में माना जाता है कि एक दौर मातृसत्तात्मक का था। कई जनजातीय समाजो में यह हाल...

स्वामी आत्मानन्द और पेंड्रा – कुछ यादें

- प्रतिभू बनर्जी वर्तमान में पूरे छत्तीसगढ़ में जिनके नाम पर हिन्दी और अँग्रेजी माध्यम के उत्कृष्ट शालाएँ खोली जा...

विशेष लेख : पोला तिहार : ग्रामीण जनजीवन में खुशहाली का प्रतीक

भारतीय संस्कृति में पशु पूजा की परम्परा रही है, इसके प्रमाण सिन्धु सभ्यता में भी मिलते हैं। खेती किसानी में...

मेरी ज़मीन मेरा सफ़र : ज़ज़्बात की शायरी

शायरी की परंपरा बहुत पुरानी है और काफी मथी जा चुकी है।फ़ारसी-उर्दू-हिंदी की यह परम्परा मुसलसल जारी है, और लोकप्रिय...

लछमनिया का चूल्हा:अस्मिता और अधिकार की चिंता

समकालीन राजनीति और साहित्य में आदिवासी स्वर तीव्रता से उभर कर आया है; जो स्वाभाविक है. एक लंबे समय तक...