आंखी के काजर आंसू मा जरगे…….. लिखनेवाले
स्मृतिशेष मधु धांधी के सृजन माधुर्य का अभिनंदन
( 21 जून 1951- 3 अप्रैल 1977 )
फेर परगे संगी अकाल कइसे करबो
दुकाल एसो परगे ना
पानी के दिन भागिस त आइस जाड़ ।
बिन घर के कतको ल कर डारिस बाढ़।
दू बेरा कतको त नइ पावैं भात।
बिन ओन्हा -चेंदरा के काटत हन रात।
फेर आगे संगी जंजाल कइसे करबो
ए जाड बैरी जरगे गे हे का
जैसी पंक्तियों में दुर्भिक्ष और रोटी , कपड़ा ,मकान की विभीषिका को चित्रित करनेवाले ग्राम खुटेरी ( पिथौरा ) के कवि मधु
धांधी ने पौने छब्बीस वर्ष की अपनी छोटी सी जीवन यात्रा में अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से हिंदी और छत्तीसगढ़ी काव्य संसार को समृद्ध किया।
इनकी रचनाएं सरिता, मुक्ता से लेकर अनेक पत्र-पत्रिकाओं में
जगह पाती रहीं।वहीं आकाशवाणी रायपुर से प्रसारित होकर सराही
जाती रहीं। पैरी कवि सम्मेलन में मधु की प्रस्तुति की याद आज भी
रामेश्वर वैष्णव करते हैं।
नारायण लाल परमार ने भी मधु की अभिव्यक्ति क्षमता पर दृष्टिपात करते हुए उन्हें सर्वाधिक ईमानदार युवा स्वर बताया था । लेकिन गोरख पांडेय की तरह अपने समय की निर्मम विषमताओं को सह न पाने के कारण मधु ने आत्मघात का आलिंगन कर लिया।
1981-82 में प्रकाशित आचार्य क्षेमचंद्र सुमन द्वारा संपादित
“दिवंगत हिंदी सेवी ” में मधु धांधी का परिचय समादृत है। उनके
निर्वाण के उपरांत उनके सुधी मित्रों ने मधु धांधी की कविताओं को
पुस्तकाकार देकर अभूतपूर्व कार्य किया है।
1977 में मधु की हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी कविताओं का संग्रह “हृदय का पंछी”प्रकाशित हुआ। 2022 में ” मोर सुरता के गांव ”
( छत्तीसगढ़ी गीत संग्रह)और ” मेरा सागर तुम्हारी कश्ती”( हिंदी गीत संग्रह) जैसी कृतियां वैभव प्रकाशन ने प्रकाशित कर स्तुत्य कार्य किया।
एतदर्थ डा.सुधीर शर्मा बधाई के पात्र हैं। उनकी रचनाओं को संग्रह रूप देकर आगे लाने में स्वराज्य करुण ने अपने करुण होने का सार्थक परिचय दिया है । विगत 21 जून 2025 को मधु धांधी के 75 वें जन्म दिवस पर उनके गृहग्राम खुटेरी में मधु धांधी की प्रतिमा का अनावरण एक सराहनीय उपक्रम है ,सच्ची श्रद्धांजलि है।
गौना के बहाने छत्तीसगढ़ी नारी की पीड़ा को उकेरनेवाली म़धु की
गहन गंभीर पंक्तियां द्रष्टव्य हैं –
आंसू ले लुगरा के अंचरा भरगे।
आंखी के काजर आंसू मा जरगे।
डॉ देवधर महंत