स्त्रियों… सहेजना उन पुरुषों को…
स्त्रियों,
सहेजना उन पुरुषों को,
जिन्होंने प्रेम किया,
पर नहीं लिखा अपने साथ,
दीवारों पर तुम्हारा नाम,
जिन्होंने प्रेम की मुलाकातों के लिए,
बंद कमरे नहीं,
मंदिर चुने !
और अनुभूति के लिए
आलिंगन नहीं,
ध्यान !
जो नहीं प्रदर्शित करते प्रेम,
बाजारों में पकड़कर तुम्हारा हाथ,
पर सुरक्षित रखते हैं तुम्हारा सम्मान
अपनी मुट्ठियों में,
जिन्होंने नहीं दिए हीरे मोती, भेंट में,
पर दिया है
तुम्हारे सपनों को विस्तार,
और साथ का संबल,
सोलह श्रृंगारों के पहले श्रृंगार में..
जो हर बार भूल जाते हैं सालगिरह,
काम की व्यस्तता में,
पर उन्हें याद रहती हैं तारीखें,
घर की ईएमआई और बच्चों की फीस की..
जो महीने के आखिर में,
अपने पास बचे उन आखिरी रुपयों से,
खरीद लाते हैं,
मां की दवाइयां,
अपनी ख्वाहिशों को अगले महीने के नाम करके,
और फिर उसके अगले…
जो भूल गए हैं अपने शौक,
पर नहीं भूले ,
अपनी जिम्मेदारियां..
मान देना उन्हें,
यदि मिलें हो तुम्हे ऐसे पुरुष,
और कहना उन्हे,
जो कभी नहीं कहा गया उनसे,
कहना ये,
की उत्सव होने जैसा है,
“तुम्हारा जीवन में होना ” Swarika Kirti