युद्ध और कविता
- चंद्रेश्वर युद्ध के बारे में मेरा अभिमत एकदम स्पष्ट है। यह पूरे विश्व और विशेष रूप से भारत वर्ष...
- चंद्रेश्वर युद्ध के बारे में मेरा अभिमत एकदम स्पष्ट है। यह पूरे विश्व और विशेष रूप से भारत वर्ष...
भाजी बोहार के। राँध भूंज बघार के।। दे लसुन मिर्चा के फोरन। छीटा मार मही दार के।। तन मन ला...
पर जानती हूं उस देश को जहां मेरा बेटा रहता है जानती हूं उस देश को जहां स्कूल के अहाते...
(रचनाकार:निवेदिता बांदिल) तिथि: 08/03/2026 राम ने मार दिया था रावण को, फिर रावण क्यों नहीं मरता है? हर युग में...
जशपुर के चाय बागान और सोगड़ा आश्रम - बीरेन्द्र श्रीवास्तव की कलम से कुम्हार के घूमते चाक पर रखी मिट्टी...
पृथ्वी घूम रही है अपनी धुरी पर पिछले कई हज़ार वर्षों से। समुद्र हैं, इतने ही खारे लेकिन समुद्र में...
छत्तीसगढ़ी के ठेठ देहाती कवि डाँ.बलदेव:- लइका पढ़ई के सुघ्घर करत हवँव मैं काम कोदूराम दलित हवय मोर गंवइहा नाम...
बहुत लम्बा/बड़ा है दादा श्री बालकवि बैरागी का यह लेख। किन्तु मुझे आकण्ठ विश्वास है कि आपने यदि पढ़ना शुरू...
2008-09 के आसपास का समय मेरे जीवन की स्मृतियों में किसी हल्का हिलता सा लेकिन गहरे जलाशय की तरह ठहरा...
मिट्टी की देहरी पर सिमटी-सी भोर है, अंगारों की लौ में जीवन की डोर है। नन्हीं हथेलियों में दिन का...