जिम्बाब्वे के शीर्ष कवि चेन्जेराई होव की कुछ और कविताएं : गणतंत्र की शक्ति
गणतंत्र की शक्ति बख़्तरबंद गाड़ियों से नहीं मापी जाती न ही बन्दूकों, विषों, या ग़ायब कर दिये जाने से। गणतंत्र...
गणतंत्र की शक्ति बख़्तरबंद गाड़ियों से नहीं मापी जाती न ही बन्दूकों, विषों, या ग़ायब कर दिये जाने से। गणतंत्र...
आलेख - स्वराज करुण *** आज से कुछ दशक पहले कवियों में साझा कविता -संग्रह छपवाने का उत्साह हुआ करता...
समकालीन समाज की सोनोग्राफी अलका सरावगी जितना सुगठित वाक्य लिखती हैं वैसा ही गठन उनके उपन्यास ‘कलकत्ता कॉस्मोपॉलिटन : दिल...
विजयमनोहर तिवारी ----------- शोध के केंद्र में भारत हो, इस ध्येय का अर्थ क्या है? क्या केवल भारत का इतिहास,...
इतिहास, अभिलेख और स्मृति के सजग प्रहरी राजेश गाबा। प्रिंस 9893443010 मप्र गजेटियर के पूर्व संचालक, राज्य अभिलेखागार के संस्थापक...
आलेख स्वराज करुण समय -समय पर अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा के विगत 50 वर्षों...
टपक रहा छप्पर से पानी वह निर्मम बरसात लिखो। लिखो कहानी फिर हल्कू की पूस ठिठुरती रात लिखो। सिसक रही...
भरोसा था जिसपे दग़ा दे रहा है ये रहज़न नहीं रहनुमा दे रहा है जिसे देखो वो मशवरा दे रहा...
वह सेमल के फूलों से करती है अपने प्रेमी का शृंगार धीरे-धीरे पिलाती है उसे ज्वार का पेज ताड़ कांदा...
मैं चुपचाप खडा रहा दरवाज़े पर सिर टिकाए रोशनी, धूल और धुएं की तरह; मैं भी आना चाहता था घर...