October 22, 2026

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06 अक्टूबर : तीसरी पुण्यतिथि “डॉ. बल्देव : एक जीती-जागती संस्था”

बहुत से व्यक्ति किसी विधा-विशेष में दक्ष होते हैं, उन्हें हम उनकी विशेष विधा के कारण पहचानते हैं। कुछ व्यक्ति...

आधे-अधूरे : पूर्णता की तलाश बेमानी है

मोहन राकेश जी का यह नाटक अपने पहले मंचन(1969) से ही चर्चित रहा है.तब से अब तक अलग-अलग निर्देशकों और...

मेरी ज़मीन मेरा सफ़र :ज़ज़्बात की शायरी

शायरी की परंपरा बहुत पुरानी है और काफी मथी जा चुकी है।फ़ारसी-उर्दू-हिंदी की यह परम्परा मुसलसल जारी है, और लोकप्रिय...

डॉ. सुधीर शर्मा को अंतरराष्ट्रीय प्रेमचंद सम्मान

भारतीय नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम नार्वे और स्पाइल दर्पण पत्रिका नार्वे के संयुक्त तत्वावधान में मुंशी प्रेमचंद जयंती के...

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