April 4, 2025

सिनेमा

समीक्षा : नव प्रकाशित काव्य संग्रह “शिलाएं मुस्काती हैं “

काव्य संग्रह का नाम : शिलाएं मुस्काती हैं लेखिका : यामिनी नयन गुप्ता पब्लिशर : प्रखरगूंज पब्लिकेशन मूल्य : 195/...

विजय बहादुर सिंह की पुस्तक,’जातीय अस्मिता के प्रश्न और जयशंकर प्रसाद’पर चर्चा।

पिछले तीस जून को मुक्तिबोध साहित्यिक मंच, इलाहाबाद ने वरिष्ठ आलोचक विजय बहादुर सिंह की अभी हाल ही में प्रकाशित...

संवेदनीयता को नुकीलापन देती लघुकथाएँ

संतोष श्रीवास्तव की कतिपय लघु कथाओं से साक्षात्कार समाजशास्त्र के कई पन्नों को दृश्यात्मक बनाता है। कहीं मामूली सा जीवन...

आवेग और आक्रोश से उपजी कविताओं की मुखर अभिव्यक्ति है- “ जब भी मिलना”

कोरोना काल में पढ़ी गई कुछ किताबें जो भीतर मंथन पैदा करती है उनमें फ़िनलैण्ड की कवयित्री मैर्ता तिक्कानेन की...

समीक्षा : आदरणीया भाभी जी शिरोमणी माथुर की बहुआयामी कृति अर्पण की

समीक्षक : किशोर " संगदिल-परबुधिया " हस्ताक्षर साहित्य समिति, दल्ली राजहरा. यूं तो किसी भी रचना की समीक्षा करना चाहे...

साइना सिनेमा की सार्थकता के नये आयाम

"साइना " - समीक्षा हमारे देश में फौजियों और खिलाड़ियों का अभिनय करने वालों की पूछ परख फौजियों और खिलाड़ियों...

कार्यस्थल में यौन उत्पीड़न की घटनाएं सभ्य समाज के लिए कलंक, स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में वेबिनार

कार्य स्थल पर कामकाजी महिलाओं की स्थिति और यौन उत्पीडन की घटनाएं आज भी सभ्य समाज में जारी है और...