September 6, 2026

सिनेमा

तीसरी कसम : न कोई इस पार हमारा, न कोई उस पार

रेणु की चर्चित कहानी 'तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफ़ाम' पर आधारित फ़िल्म 'तीसरी कसम'(1966) की काफ़ी चर्चा होती रही...

समीक्षा : नव प्रकाशित काव्य संग्रह “शिलाएं मुस्काती हैं “

काव्य संग्रह का नाम : शिलाएं मुस्काती हैं लेखिका : यामिनी नयन गुप्ता पब्लिशर : प्रखरगूंज पब्लिकेशन मूल्य : 195/...

विजय बहादुर सिंह की पुस्तक,’जातीय अस्मिता के प्रश्न और जयशंकर प्रसाद’पर चर्चा।

पिछले तीस जून को मुक्तिबोध साहित्यिक मंच, इलाहाबाद ने वरिष्ठ आलोचक विजय बहादुर सिंह की अभी हाल ही में प्रकाशित...

संवेदनीयता को नुकीलापन देती लघुकथाएँ

संतोष श्रीवास्तव की कतिपय लघु कथाओं से साक्षात्कार समाजशास्त्र के कई पन्नों को दृश्यात्मक बनाता है। कहीं मामूली सा जीवन...

आवेग और आक्रोश से उपजी कविताओं की मुखर अभिव्यक्ति है- “ जब भी मिलना”

कोरोना काल में पढ़ी गई कुछ किताबें जो भीतर मंथन पैदा करती है उनमें फ़िनलैण्ड की कवयित्री मैर्ता तिक्कानेन की...