राजकुमार जैन राजन की चार कविताएँ
1. *प्रश्न और उत्तर* """""""""""""""" जिंदगी के थपेड़ों में गुम हो चुके प्रश्नों को खोज लेने से क्या होगा जबकि...
1. *प्रश्न और उत्तर* """""""""""""""" जिंदगी के थपेड़ों में गुम हो चुके प्रश्नों को खोज लेने से क्या होगा जबकि...
किचबिच-किचबिच करे शहर, उलझे लोग हैं उलझा डगर। न हरियाली कोई छाँव, बढ़िया मनवा मेरा गाँव। तर्क पे भारी पड़े...
आ जाओ हे प्रियतम, तुम लेकर सुंदर मन। अब कोई नही मेरा, तुम ही हो जीवन-धन। 1 तुमसा न लगे...
उस अवस्था में मैं विकारों से भरा हुआ था। बिना विकार, कोई जीव होता है क्या? पत्थर में भी विकार...
'मैंने कोई गलती नहीं की इनसे शादी करके। आखिर हम दोनों ने मनपसंद शादी की है।' अनुराधा मीटिंग में बड़ी...
बढ़ी सजकता से बोर्ड परीक्षा में कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी कर रहा था । मैंने पहले ही मन मे ठान...
खुशियों का पुष्पन-पल्लवन... धरती से धड़ाधड़ जंगल कटते जा रहे हैं कंक्रीट के महल खड़े होते जा रहे हैं हमारे...
परिचय - ज्ञानीचोर शोधार्थी व कवि साहित्यकार मु.पो. रघुनाथगढ़, सीकर राज. पिन - 332027 मो. 9001321438 दोपहर धूप बड़ी तेज...
"प्रकृति" तुम्हारा कुछ पल आ जाना तुम्हारा कुछ पल आ जाना ही काफी हो जाता है। पर आज जी नहीं...
देख सजनी देख ऊपर।। इंजनों सी दड़दड़ाती, बम सरीखी धड़धड़ाती रेल जैसी जड़बड़ाती, फुलझड़ी सी तड़तड़ाती।। पंछियों सी फड़फड़ाती,पल्लवों को...